ग्वालियर में भाजपा को मिली जीत… कौन हैं वार्ड 39 उपचुनाव में पार्षद चुनी गईं अंजलि पलैया
लोकमत सत्याग्रह/ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में वार्ड क्रमांक 39 के उपचुनाव में गुरुवार को मतगणना हुई। दो चरणों के बाद ही परिणाम स्पष्ट हो गया। इस दौरान कलेक्टर और रिटर्निंग अधिकारी मौजूद रहे। विजयपुर उपचुनाव के बाद यह चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया था।
जीत के बाद प्रमाण-पत्र के साथ अंजलि पलैया और भाजपा के अन्य नेता
HIGHLIGHTS
- 1076 वोट से जीतीं अंजलि पलैया
- कांग्रेस की शिवानी खटीक हारीं
- दोनों दलों की प्रतिष्ठा दांव पर थी
ग्वालियर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 39 पर हुए पार्षद उपचुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की है। भाजपा उम्मीदवार अंजलि पलैया को 1076 मतों से विजयी घोषित किया गया। इस वार्ड में भाजपा पार्षद राजाबेटी के निधन के कारण उपचुनाव हुआ था। अंजलि पलैया पूर्व महापौर और पूर्व विधायक स्व. पूरन सिंह पलैया की बहू हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस की शिवानी खटीक से हुआ था।
बता दें, राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत ग्वालियर नगर निगम के वार्ड-39 में पार्षद पद के लिए डाले गए मतों की गिनती गुरुवार 12 दिसंबर को सुबह 9 बजे से एमएलबी कॉलेज में हुई।
इससे पहले कलेक्टर एवं रिटर्निंग अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) रुचिका चौहान द्वारा मतगणना के लिए तैनात किए गए दलों का बुधवार को कलेक्ट्रेट में रेंडमाइजेशन किया गया। इसी तरह मतगणना दलों को अंतिम प्रशिक्षण देकर मतगणना की बारीकियां एक बार फिर से सिखाई गईं।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी संजीव जैन ने बताया कि वार्ड-39 के उपचुनाव के लिए हुए मतदान में कुल 15 ईवीएम उपयोग में लाई गई थीं। इन ईवीएम में दर्ज मतों की गिनती 12 दिसंबर को सुबह 9 बजे से एमएलबी कॉलेज में हुई। मतों की गिनती के लिए आठ टेबल लगाई गई थीं।
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पार्षद उपचुनाव में दोनों दलों की प्रतिष्ठा दांव पर थी
- मतगणना से पहले भाजपा उम्मीदवार अंजलि पलैया व कांग्रेस उम्मीदवार शिवानी खटीक के साथ दोनों दलों के प्रमुख नेताओं की सांसें थमी रहीं। चुनाव में जिले के वरिष्ठ नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर थी।
- दोनों प्रत्याशियों के बीच कांटे का मुकाबला माना जा रहा था। कांग्रेस के एकजुटता के साथ चुनाव लड़ने पर भाजपा ने भी सांसद व मंत्री सहित पूरे संगठन को मैदान में उतारा था।
दोनों ही दल मतदान से पहले जीत का दावा कर रहे थे। खासतौर पर विजयपुर विधानसभा उपचुनाव के बाद यह चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया था।


