सागर लोक अदालतें प्रकरणों के निराकरण का सबसे सुलभ व सस्ता माध्यम।

लोकमत सत्याग्रह  / नीरज वैद्यराज /सागर,. 53 खण्डपीठों द्वारा 4867 प्रकरण निराकृत किए गए जिसमें राशि रूपये 24,57,59,529/-(चौबीस करोड़ संतावन लाख उनसठ हजार पॉच सौ उनतीस रूपये) का अवार्ड पारित किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली व मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के दिशा-निर्देशानुसार दिनाँक 14/12/2024 (शनिवार) को नेशनल लोक अदालत का आयोजन जिला न्यायालय, सागर एवं समस्त तहसील न्यायालयों में किया गया।

                                जिला मुख्यालय, सागर में उक्त नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ माननीय  माननीय प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष महोदय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सागर महेश कुमार शर्मा द्वारा मॉं सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्जवल व माल्यार्पण कर किया गया जिसमें विशेष न्यायाधीश व को-आर्डिनेटर नेशनल लोक अदालत प्रदीप सोनी, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दिनेश सिंह राणा, अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ जितेन्द्र सिंह राजपूत एवं म.प्र. राज्य अधिवक्ता परिषद् जबलपुर के सदस्यगण राजेश पाण्डे व श्रीमती रश्मिऋतु जैन, समस्त न्यायाधीशगण, आयुक्त नगर पालिक निगम राजकुमार खत्री, अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश सिन्हा, जिला विधिक सहायता अधिकारी योगेश बंसल, जिला अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष महेन्द्र सिंह कौरव, सचिव कुवंर वीरेन्द्र प्रताप सिंह, आकाशवाणी कार्यक्रम प्रमुख दीपक निषाद, अधिवक्तागण, न्यायालयीन कर्मचारीगण व बैंक, विद्युत, बी.एस.एन.एल., बीमा कंपनियों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

                                उक्त कार्यक्रम को संबोधित करते हुय प्रधान जिला न्यायाधीश महोदय महेश कुमार शर्मा द्वारा अपने उद्बोधन में आमजन को संदेश दिया कि समय-समय पर आयोजित होने वाली  नेशनल लोक अदालत के माध्यम से पक्षकारगण द्वारा अपना मामला निराकृत करवाये जाने पर उनके समय व धन की बचत होती है। इस अवसर पर सचिव श्री दिनेश सिंह राणा द्वारा नेशनल लोक अदालत में गठित खण्डपीठों की जानकारी वर्णित करते हुये रूपरेखा इत्यादि की जानकारी दी।

                                दिनांक 14.12.2024 को आयोजित नेशनल लोक अदालत हेतु संपूर्ण जिले मंे कुल 53 खण्डपीठों का गठन किया गया, जिसमें न्यायालय में लंबित प्रकरणों में से 1482 प्रकरण एवं प्री-लिटिगेशन के 3385 प्रकरणों का निराकरण राजीनामा के आधार पर किया गया, जिसमें मोटर दुर्घटना के 92 प्रकरणों का निराकरण कर क्षतिपूर्ति राशि रूपये 1,90,50,000/- के अवार्ड पारित किए गए, चैक बाउंस के 267 प्रकरणों के निराकरण में कुल राशि रूपये 6,72,24,789/- का समझौता अवार्ड किया गया। आपराधिक प्रकृति के शमन योग्य 628 प्रकरण, विद्युत के 161 प्रकरण, पारिवारिक विवाद के 88 प्रकरण तथा दीवानी एवं अन्य प्रकृति के 44 प्रकरणों का निराकरण किया गया। विभिन्न बैंकों के 236 प्री-लिटिगेशन प्रकरण, विद्युत विभाग के 544 प्री-लिटिगेशन प्रकरण, नगर निगम के 1378 प्री-लिटिगेशन प्रकरण, ई ट्रेफिक चालान के 1070 प्रीलिटिगेशन संबंधी प्रकरण एवं अन्य प्रकृति के प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण भी इस अवसर पर हुआ जिसमें राशि रूपये 10,85,28,535/- का राजस्व प्राप्त हुआ।                                         

सफलता की कहानी:-

न्यायालय प्रधान जिला न्यायाधीश, महोदय सागर के न्यायालय में लंबित प्रकरण एम.ए.सी.सी. प्रकरण में मृतक के परिवारजन की ओर से दावा प्रकरण प्रस्तुत किया गया था जिसमें माननीय प्रधान जिला न्यायाधीश,सागर के द्वारा उभयपक्ष को समझाईश दी गई और पृथक-पृथक उभय पक्षों के तथ्यों को सुना, उसके बाद उभयपक्षों के मध्य 13,00,000/- रूपये में पूर्ण संतुष्टि में राजीनामा हुआ। उक्त प्रकरण में मृतक प्राईवेट नौकरी कर प्रतिमाह लगभग 18,000/- रूपये की राशि अर्जित कर अपना व परिवार का भरण-पोषण करता था।

02.                          परिवार न्यायालय, सागर में आवेदक के द्वारा अनावेदिका के विरूद्ध विवाह विच्छेद संबंधी मामला प्रस्तुत किया गया था। प्रकरण में आवेदक के दो बच्चे एक पुत्र व एक पुत्री थे आवेदक परिवार सहित संयुक्त परिवार में निवास करता था एवं प्राईवेट नौकरी कर अपना व अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। परन्तु अनावेदिका संयुक्त परिवार में नहीं रहना चाहती थी। इस कारण से अनावेदिका आवेदक को परेशान करती थी एवं आवेदक को झूठे प्रकरणों में फसाने की एवं स्वयं आत्महत्या करने की धमकी देती थी आवेदक अपनी गृहस्थी को बचाने के उद्देश्य से संयुक्त परिवार से अलग निवास करने लगा परन्तुत अनावेदिका के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया और अनावेदिका बार-बार बिना बताये अपने मायके चली जाती और कहती कि आवेदक तुच्छ कार्य कर कम पैसे कमाता है कम से कम एक लाख रूपये कमाये तब ही साथ रहेंगे। अनावेदिका आवेदक के साथ लड़ती झगड़ती और उसे परेशान करती जिससे आवेदक अस्वस्थ रहने लगा तथा आवेदिका वर्ष 2021 से बिना किसी कारण के अलग निवास करने लगी, उक्त प्रकरण में माननीय प्रधान जिला न्यायाधीश, महोदय सागर के द्वारा उभयपक्ष को समझाईश दी गई और पृथक-पृथक उभय पक्षों के तथ्यों को सुना, उसके बाद उभय पक्ष के मध्य राजीनामा होकर साथ-साथ रहने को तैयार हो गये।

03.                          माननीय न्यायालय श्री आशीष शर्मा, न्यायिक मजिस्ट्रेट, सागर के न्यायालय में लंबित प्रकरण एम.जे.सी.आर. में आवेदिका 2022 से अपने दो बच्चों सहित अपने पति से  पारिवारिक विवाद के चलते पृथक से रह रही थी। आवेदिका के द्वारा न्यायालय में स्वयं अपने बच्चों के लिये भरण-पोषण का प्रकरण पेश किया था। जिसमें पारित आदेश के पालन न होने से आवेदिका द्वारा यह प्रकरण प्रस्तुत किया था उक्त प्रकरण में माननीय न्यायालय द्वारा उभयपक्ष को समझाईश दी गई और पृथक-पृथक उभय पक्षों के तथ्यों को सुना, उसके बाद उभय पक्ष के मध्य राजीनामा होकर साथ-साथ रहने को तैयार हो गये।

04.          न्यायालय सुश्री शिखा चतुर्वेदी, न्यायिक मजिस्ट्रेट, सागर के न्यायालय में लंबित प्रकरण एम.जे.सी.आर. में आवेदिका 2023 से अपने पति से पारिवारिक विवाद के चलते पृथक से रह रही थी। आवेदिका के द्वारा न्यायालय में भरण-पोषण का प्रकरण पेश किया था। जिसमें पारित आदेश के पालन न होने से आवेदिका द्वारा यह प्रकरण प्रस्तुत किया था उक्त प्रकरण में माननीय न्यायालय द्वारा उभयपक्ष को समझाईश दी गई और पृथक-पृथक उभय पक्षों के तथ्यों को सुना, उसके बाद आवेदिका के पति ने आवेदिका को एक मुश्त राशि 4,00,000/- रूपये में पूर्ण संतुष्टि में राजीनामा हो गया।

05.          न्यायालय श्रीमती मीनू पचौरी दुबे, न्यायिक मजिस्ट्र्ेट, सागर के न्यायालय में लंबित एस.सी.एन.आई.ए. प्रकरण में आवेदक एच.डी.एफ.सी. बैंक के द्वारा 6,95,000/- के   द्वारा चैक अनादृरित होने के संबंध में मामला प्रस्तुत किया गया जिसमंे अनावेदक द्वारा के.जी.सी. गोल्ड कार्ड के तहत ऋण आवेदक बैंक से लिया गया था उक्त प्रकरण में माननीय न्यायालय द्वारा उभयपक्ष को समझाईश दी गई और पृथक-पृथक उभय पक्षों के तथ्यों को सुना, उसके बाद उभयपक्ष के मध्य राजीनामा होने से प्रकरण वापिस लिया गया।

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