लोकमत सत्याग्रह : महाकुंभ का शुभारंभ पौष पूर्णिमा के अवसर पर हुआ है। पहले दिन 1 करोड़ श्रद्धालु संगम स्नान करेंगे। श्रद्धालुओं के लिए 12 किमी एरिया में स्नान व्यवस्था की गई है, और वाहनों को 12 किमी दूर रोका गया है, जिससे श्रद्धालु पैदल संगम पहुंच रहे हैं।
HIGHLIGHTS
- महाकुंभ पौष पूर्णिमा पर शुरू।
- 1 करोड़ श्रद्धालु संगम स्नान करेंगे।
- वाहनों को 12 किमी दूर रोका गया।
महाकुंभ का शुभारंभ हो चुका है। इसका श्रद्धालुओं को लंबे समय से इंतजार था। पौष पूर्णिमा के अवसर पर पहले दिन लगभग 1 करोड़ श्रद्धालु संगम स्नान करेंगे। श्रद्धालुओं को आज से 45 दिन का कल्पवास शुरू हो जाएगा।
12 किमी के एरिये में स्नान की पूरी व्यवस्था की गई है, जिससे श्रद्धालुओं की समस्या न हो। भक्तों की भारी भीड़ संगम के सभी रास्तों पर देखी जा रही है। ऐसे में वाहनों को 12 किमी दूर ही रोका जा रहा है। श्रद्धालु संगम स्थान तक पहुंचने के लिए वहीं से पैदल चल रहे हैं।
60 हजार जवान संभाल रहे हैं सुरक्षा व्यवस्था
महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा 60 हजार जवान संभाल रहे हैं। इस दौरान पुलिसकर्मी लगातार स्पीकर श्रद्धालुओं को गाइड कर रहे हैं, जिससे भीड़ को आसानी से मैनेज किया जा सके। कमांडो और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान चंपे-चंपे पर मौजूद हैं।
विदेशी भक्त कुंभ के हुए दीवाने
भीषण ठंड में विदेशी भक्त का महाकुंभ को लेकर जुनून देखते ही बन रहा है। एप्पल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल भी महाकुंभ पहुंची हैं। उन्होंने निरंजनी अखाड़े में अनुष्ठान कर कल्पवास की शुरुआत की।
महाकुंभ 2025 में दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन से आई एक श्रद्धालु निक्की आई हैं। वह महाकुंभ के बारे में कहती हैं कि यह बहुत पावरफुल है। हम यहां गंगा नदी पर आकर बहुत भाग्यशाली हैं।
रूसी भक्त को लगा ‘मेरा भारत महान‘
महाकुंभ में एक रूसी भक्त आई हैं। उन्होंने कहा कि ‘मेरा भारत महान’। भारत एक महान देश है। हम यहां पहली बार कुंभ मेले में आए हैं। यहां हम असली भारत देख सकते हैं। यहां असली शक्ति निहित है। इस पवित्र स्थान की वाइब को महसूस कर मेरे रोंगटे खड़े हो रहे हैं।
जर्मनी से जितेश अपनी पत्नी सास्किया के साथ पहुंचे कुंभ
मैसूर के मूल निवासी और अब जर्मनी में रह रहे जितेश प्रभाकर अपनी पत्नी सास्किया नॉफ और एक बच्चे आदित्य के साथ महाकुंभ 2025 में पहुंचे हैं।
जितेश ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं यहां (भारत में) रहता हूं या विदेश में रहता हूं। अपनी मिट्टी से जुड़ाव होना चाहिए। मैं हर दिन योग का अभ्यास करता हूं। व्यक्ति को जमीन से जुड़े रहना चाहिए। सास्किया नॉफ ने बताया कि मैं बहुत उत्साहित हूं। मुझे यहां आना हमेशा अच्छा लगता है


