लोकमत सत्याग्रह : Maha Kumbh 2025 बजरंग दास मार्ग पर भारतीय सेना की ओर से लगाए गए नेत्र चिकित्सा शिविर में सेवाएं दे रही मेडिकल कोर की टीम विदा हो गई। अब उसकी जगह दूसरी टीम ने जिम्मेदारी संभाल ली है। विदा लेते समय सेना के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए। सेना के अधिकारियों ने कहा कि नेत्र कुंभ में कार्य करने का अनुभव अवर्णनीय है।
प्रयागराज। महाकुंभ नगर के सेक्टर छह में बजरंग दास मार्ग पर भारतीय सेना की ओर से लगाए गए नेत्र चिकित्सा शिविर में सेवाएं दे रही मेडिकल कोर की टीम विदा हो गई। अब उसकी जगह दूसरी टीम ने जिम्मेदारी संभाल ली है। विदा लेते समय सेना के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए।
इस नेत्र चिकित्सा शिविर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपनी आंखों की जांच करा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर चश्मे भी वितरित किए जा रहे हैं। सेंट्रल कमांड लखनऊ क्षेत्र के ब्रिगेडियर डॉ. एके सिंह के मार्ग दर्शन में पांच नेत्र विशेषज्ञ चिकित्सक और 12 से अधिक टेक्नीशियन की टीम सेवा दे रहे हैं।
डॉक्टरों की टीम दे रही सेवा
नोडल अधिकारी मेजर अभिषेक सिंह ने बताया कि पांच डॉक्टरों की टीम 10-10 दिनों के क्रम से सेवा दे रही है। पहली टीम 12 जनवरी को आई थी, जिसे विदाई दे दी गई है। अब दूसरी टीम ने कार्यभार संभाल लिया है।
आर्मी के डॉक्टरों ने साझा किए अपने अनुभव
शिविर में सेवाएं दे चुके मिलिट्री अस्पताल मेरठ के कर्नल डॉ. शिशिर गौड़, गया से आए कर्नल मनीष झा, कमांड अस्पताल लखनऊ से आये कर्नल डॉ. अंजनी कुमार, कर्नल डॉ. मीनू और आगरा से आए कर्नल डॉ. सुनंदन भट्ट ने अपने अनुभव साझा किए।
सेना के अधिकारियों ने कही ये बात
सेना के अधिकारियों ने कहा कि नेत्र कुंभ में कार्य करने का अनुभव अवर्णनीय है। समाज सेवा के बड़े लक्ष्य के साथ यहां लोगों की चिकित्सा सेवा की जा रही है। काफी कम समय में अत्याधुनिक उपकरण से आंखों की जांच, चिकित्सकीय परामर्श एवं निश्शुल्क चश्मा वितरण किसी चमत्कार से कम नहीं है।
स्मृति चिन्ह भेंटकर चिकित्सकों को दी गई विदाई
नेत्र कुंभ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कर्नल डॉ. प्रवीण कुमार रेड्डी ने स्मृति चिन्ह भेंटकर चिकित्सकों को विदा किया। इस दौरान नोडल अधिकारी ने बताया कि जबलपुर, मऊ, पंचमढ़ी, वाराणसी और लखनऊ से पांच चिकित्सक नेत्र कुंभ में पहुंच चुके हैं। वे दस दिनों तक सेवा कार्य करेंगे।
ISRO के वैज्ञानिक ने गंगा को अर्पित किया ‘चंद्रयान 3′ का मॉडल
पुण्यदायिनी गंगा में स्नान के दौरान श्रद्धालु सूरज देवता को जल अर्पित करते हैं, लेकिन इसरो के एक वैज्ञानिक वेदमंत्रों का जाप कर एक छोटा सा यंत्र गंगाजी को समर्पित करते हुए डुबकी लगा रहे हैं। यह कुछ और नहीं, बल्कि 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान मिशन की सफलता का अनुष्ठान है। वैज्ञानिक ने गंगाजी की गोद में चंद्रयान का एक मॉडल अर्पित कर आगे के मिशनों के लिए भी आशीर्वाद मांगा।
ये वैज्ञानिक डॉ. विनोद अग्रवाल हैं। डॉ. विनोद चंद्रयान मिशन का कंट्रोल सिस्टम संभाल रहे थे। विनोद कहते हैं- “विज्ञान भी परमसत्ता से ऊर्जा लेती है। यही सृष्टि की वास्तविक संचालक शक्ति है।”


