सुप्रीम कोर्ट ने भुजबल की जमानत याचिका खारिज की: मामला समझें

लोकमत सत्याग्रह : महाराष्ट्र के एनसीपी नेता छगन भुजबल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने भुजबल की जमानत के खिलाफ ईडी की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई 22 जनवरी को करने की बात कही है। आइए पढ़ते हैं सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें।

महाराष्ट्र के एनसीपी नेता छगन भुजबल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने भुजबल की जमानत के खिलाफ ईडी की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है। 


न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि मनी लॉड्रिंग मामले में गिरफ्तारी को लेकर छगन भुजबल की याचिका के बाद उनको 2018 में जमानत पर रिहा किया गया था। मौजूदा समय में उनकी गिरफ्तारी की अवैधता के सवाल पर विचार करना आवश्यक नहीं है। जमानत देने संबंधी आदेश वर्ष 2018 में ही पारित कर दिए गए थे। इसलिए संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत इस स्तर पर हस्तक्षेप का कोई मामला नहीं बनता है। याचिका खारिज की जाती है।


नई दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन घोटाला, आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग समेत 11 मामलों में फंसे महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल को 2016 में ईडी ने गिरफ्तार किया था। इस मामले में भुजबल के भतीजे समीर भुजबल को भी पकड़ा गया था।


आरोप है कि भुजबल ने नई दिल्ली में महाराष्ट्र सदन के निर्माण सहित निर्माण और विकास कार्यों से संबंधित ठेके एक विशेष फर्म को दिए। इसके बदले में उन्होंने अपने और अपने परिवार के लिए रिश्वत ली। केंद्रीय जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि भुजबल और उनके भतीजे समीर भुजबल इस धन को अपने स्वामित्व वाली अवैध कंपनियों में भेजते थे। मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने 4 मई 2018 को भुजबल को जमानत दे दी थी।


ताहिर की याचिका पर सुनवाई कल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह 22 जनवरी को एआईएमआईएम उम्मीदवार और दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन की याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में ताहिर ने दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले प्रचार के लिए अंतरिम जमानत की मांग की है।

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