रामचरित मानस का पालन करने वाले लोग कभीपाप के सहभागी नहीं हो सकते: मानस प्रवक्ता साध्वी सुश्री रश्मि शर्मा

लोकमत सत्याग्रह/इंदरगढ़/ स्वामी परिवार द्वारा प्रति वर्ष मानस प्रवक्ता रामशंकर शर्मा की स्मृति में आयोजित की जाने वाली रामचरित मानस सम्मेलन का आयोजन इस वर्ष इंदरगढ़ के संतोषी माता मंदिर पर आयोजित की जा रही है। मानस आयोजक बांके बिहारी शर्माने बताया कि रामचरित मानस सम्मेलन पिछले दस वर्षों में सुचारू रूप से संचालित की जा रही है अभी तक ये रामचरित मानस सम्मेलन ग्राम फतेहपुर में आयोजित किया जाता रहा है किंतु इस वर्ष इंदरगढ़ संतोषी माता मंदिर पर रामचरित मानस सम्मेलन का आयोजन किया गया है।तीन दिवसीय रामचरित मानस सम्मेलन में मानस प्रवक्ताओ ने प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें रामचरित मानस में बताए गए मार्ग पर चलना चाहिए और राम के पदचिह्नों का पालन करते हुए रामचरित मानस की चौपाइयों को अपने जीवन में धारण करना चाहिए। मुख्य रूप से श्री पुरुषोत्तमदास पचौरी पिंडारी, श्रीराघव किंकर, मानस आलोक कानपुर, श्री बालाराम शास्त्री झांसी, साध्वी रश्मि देवी शर्मा गरोठा, ने रामचरित मानस के अनेकों प्रसंग पर चर्चा करते हुए उपस्थित भक्तो को ज्ञान और राम रस का पान कराया।रामचरित मानस के द्वितीय दिवस में वक्ताओं ने मानस पर प्रकाश डालते हुए धर्म अनुसार जीने का तरीका बताया
मानस प्रवक्ता साध्वी सुश्री रश्मि देवी शर्मा ने अपने उजस्वी अंदाज में रामचरित मानस की चौपाइयों को सुनाते हुए कहा कि लक्ष्मण जी अपनी मां के इकलौते पुत्र थे जिसका गहन अर्थ बताते हुए मानस प्रवक्ता साध्वी सुश्री रश्मि शर्मा ने कहा कि जब श्री राम को वनवास मिला तो लक्ष्मण जी भी उनके साथ वन में जाने की जिद करते हैं तब श्रीराम जी उनसे कहते हैं कि जाओ अपनी मां से आज्ञा लेकर आओ तब लक्ष्मण जी अपनी मां सुमित्रा से वन जाने की आज्ञा लेने पहुंचे तब लक्ष्मण जी को सुमित्रा माता ने डांटते हुए कहा कि मैं तुम्हारी मां नहीं हूं तुम्हारी मां तो अब सीता जी है अनुज तुम्हार मात वैदेही ये है रामचरिच मानस का स्वभाव जो परिवार को जोड़ने का संदेश देता है। मंच संचालन बृजमोहन राजौरिया ने किया।

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