लोकमतसत्याग्रह/ग्वालियर के हाईकोर्ट परिसर में अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना के विचार से शुरू हुआ तनाव बढ़ता जा रहा है। भीम आर्मी के संगठन “भीम सेना’ ने फूलबाग पर अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सभा का ऐलान किया था, लेकिन प्रशासन ने हालात को देखते हुए अनुमति नहीं दी थी। पुलिस ने विवाद को टालने के लिए ग्वालियर-मुरैना बॉर्डर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया।
भीम सेना रैली के रूप में पहुंची तो उनको निरावली पॉइंट पर रोक लिया। भीम सेना के नेताओं ने अंदर जाने के लिए प्रयास किए तो पुलिस ने रैली की अनुमति दिखाने के लिए कहा। जिस पर विवाद हुआ और वापस लौटना पड़ा, लेकिन उससे पहले 29 जून को भीम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ग्वालियर में भीमराव अग्निपथ महासभा होने का ऐलान किया।
दरअसल ग्वालियर में हाईकोर्ट में चल रहे प्रतिमा विवाद में भीम आर्मी के भीम सेना की एंट्री होते ही पुलिस भी एक्टिव मोड पर आ गई और अपनी तैयारी पूरी कर ली। भीम सेना द्वारा जुलूस निकालकर प्रदर्शन करने की अनुमति रद्द होने के बाद भी भीम सेना प्रर्दशन करने पर अड़ी हुई थी और प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली से भी उनके राष्ट्रीय नेता व सदस्य आ रहे थे। इसे देखते हुए पुलिस ने शहर को सील कर दिया। जगह-जगह पुलिस जवानों को तैनात कर दिया। जिससे शहर का माहौल खराब ना हो.. इसके लिए करीब आठ सैकड़ा जवान तैनात किए और मॉनीटरिंग के लिए अफसरों को लगा दिया।
प्रदर्शन में शामिल होने वाले भीम सेना के नेता दिल्ली से सड़क मार्ग से ग्वालियर आ रहे थे। इसलिए ग्वालियर पुलिस ने ग्वालियर-मुरैना बॉर्डर पर बैरीकेड्स लगाकर रास्ते बंद कर दिए। दोपहर लगभग तीन बजे दिल्ली से जैसे ही भीम सेना के नेताओं की आधा सैकड़ा वाहन ग्वालियर बॉर्डर पर आई तो पुलिस अफसरों ने उनको अंदर नहीं जाने दिया। इस पर काफी देर तक नोकझोंक भी हुई। पुलिस का साफ कहना था कि तनाव और माहौल को देखते हुए फूलबाग पार्क में अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण और मैदान में सभा की अनुमति नहीं दी गई है। इसलिए आप अंदर नहीं जा सकते। यदि अनुमति है तो दिखा दें।
भीम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवाब सतपाल सिंह तंवर का कहना था कि हम अपने भगवान पर माला नहीं चढ़ा सकते तो यह क्या कानून है। दलितों को कुचला जा रहा है। इसके बाद पुलिस ने उनको ग्वालियर-मुरैना बॉर्डर से ही वापस भेज दिया। यदि हम अपने भगवान पर माल्यार्पण नहीं कर सकते तो मतलब संविधान अभी लागू नहीं हुआ। हमें हमारे अधिकार से वंचित किया जा रहा है। भाजपा शासन में दलितों को कुचला जा रहा है। पर मैं एक बात बता देना चाहता हूं कि अब दलित समाज एक है। 29 जून को ग्वालियर के फूलबाग मैदान पर “भीमराव अग्निपथ महासभा’ का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें पूरे देश का दलित समाज एकजुट होगा। यहां अंबेडकर की प्रतिमा को प्रस्तावित स्थान पर स्थापित कराने के लिए प्रयास किए जाएंगे। बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा शांति से नहीं तो क्रांति से ही सही पर वहीं हाईकोर्ट में लगेगी।


