लोकमतसत्याग्रह/मध्यप्रदेश का स्मार्ट सिटी शहर ग्वालियर इन दिनों चर्चाओं में है। लेकिन, शहर की चर्चा किसी उपलब्धि के लिए नहीं, बल्कि अपनी बदहाल सड़कों को लेकर। यहां की सड़कें देखकर ऐसा लगता है मानो यह शहर अब गांव से भी बदतर हो गया है। खासकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के महल तक जाने वाली महल रोड। यह सड़क शहर की सबसे महंगी सड़कों में से एक है, लेकिन हालत यह है कि ये सड़क पिछले 10 दिनों में 10 बार धंस चुकी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये सड़क महज एक महीने पहले ही बनाई गई थी, लेकिन शुरुआती बारिश तक भी नहीं झेल सकी। बारिश होते ही सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे हो जाते हैं।
दरअसल, माधव नगर से चेतकपुरी तक 4.30 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई यह सड़क 19 करोड़ रुपये के वाटर ड्रेन प्रोजेक्ट का हिस्सा है। यह सड़क सिंधिया महल के ठीक बगल से गुजरती है, इसलिए इसे महल रोड भी कहा जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस सड़क को बनाने में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। हालत यह है कि यह सड़क मामूली बारिश में ही कई बार धंस चुकी है। सड़क धंसने की सूचना मिलते ही निगम का अमला मौके पर पहुंचता है और हिटेची व रोलर से गिट्टी डालकर गड्ढे भर दिए जाते हैं। इससे असली कारणों और भ्रष्टाचार के सबूतों को मिटा दिया जाता है।
लोगों में नाराजगी, कांग्रेस ने भी साधा निशाना
शहरवासियों का कहना है हमें उम्मीद थी कि वॉटर ड्रेन प्रोजेक्ट के बाद एक अच्छी सड़क मिलेगी, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह सड़क भ्रष्टाचार की बुनियाद पर तैयार की गई है। इस प्रोजेक्ट के तहत सड़क पर पाइपलाइन डालने का काम लगभग 6 महीने तक चला, जिसके कारण नागरिकों को पहले ही काफी परेशानी उठानी पड़ी थी। अब जब सड़क बनी है, तो वह बार-बार धंस रही है, जिससे लोगों में काफी नाराजगी है। बता दें कि यह अकेली सड़क नहीं है, बल्कि शहर की सैकड़ों सड़कें जर्जर हालत में हैं या फिर बारिश में पूरी तरह उखड़ चुकी हैं। ऐसे में सड़क निर्माण को लेकर कांग्रेस ने भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं।
कलेक्टर ने गठित की जांच कमेटी
महल रोड के बार-बार धंसने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए ग्वालियर कलेक्टर रूचिका सिंह चौहान ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित की है। यह समित पांच दिन में जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।


