लोकमतसत्याग्रह/ग्वालियर में पीएचई विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां एक ही व्यक्ति की दो बार “मौत” दिखाकर उसके दोनों बेटों और बहू को अनुकंपा नियुक्ति दे दी गई। मामले में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है, और अब जांच जारी है। मामला पुलिस को सौंपा जाएगा।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पीएचई विभाग द्वारा एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसे सुनकर आप चौंक जाएंगे। एक व्यक्ति की मौत होने के बाद तीन लोगों को नौकरी दे दी गई। यह कारनामा मध्यप्रदेश के ग्वालियर के पीएचई विभाग ने कर दिखाया है।
पीएचई विभाग में पंप अटेंडर भूप सिंह की पहले कागजों में फर्जी मृत्यु बताकर उनके बड़े बेटे रवि को अनुकंपा नियुक्ति मिली। यानी रवि ने जीवित पिता को मृत बताकर अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त की। जबकि पिता उस समय विभाग में ही नौकरी कर रहे थे। फर्जीवाड़ा यहीं खत्म नहीं हुआ। जब वास्तव में भूप सिंह की मौत हुई, तो छोटे बेटे पुष्पेंद्र को अनुकंपा नियुक्ति मिली। यानी एक पिता की दो बार मौत हुई और हर बार उसके एक-एक बेटे को अनुकंपा नियुक्ति मिली। फर्जीवाड़े का क्रम यहीं नहीं रुका। कुछ समय दोनों भाई साथ-साथ काम करते रहे। फिर बड़े भाई रवि की मौत हुई, तो उसकी पत्नी उमा राजपूत को अनुकंपा नियुक्ति दी गई। व्यापक रूप से देखें तो भूप सिंह की मौत ना केवल उसके दोनों बेटों, बल्कि बड़ी बहू को मिली अनुकंपा नियुक्ति का आधार बनी। इस मामले में पीएचई विभाग के मुख्य अभियंता आरएलएस मौर्य का कहना है कि वह जांच कर रहे हैं और मामले को पुलिस को सौंप दिया जाएगा।
जानें कब और कैसे ली अनुकंपा नियुक्ति
बड़ा बेटा रवि, 5 सितंबर 2008 को बड़े बेटे रवि राजपूत की हेल्पर के पद पर नियुक्ति हुई। रवि के आदेश में पिता भूप सिंह की मृत्यु 2007 में होना बताया गया। रवि को पीएचई के कार्यालय कार्यपालन यंत्री के संधारण खंड क्रमांक-1 में नियमित कुली के पद पर पदस्थ बताया गया। छोटा बेटा पुष्पेंद्र, अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर छानबीन समिति ने जांच की। इसमें पाया कि 30 अक्टूबर 2021 को भूप सिंह (पंप अटेंडर) की मौत हुई। इस आधार पर छोटे बेटे को 10 फरवरी 2023 को कार्यभारित स्थापना में (अराज्यस्तरीय) चौकीदार बनाया गया। 12 जून 2022 को रवि राजपूत (कार्यभारित हेल्पर) की मौत होना बताया। इस पर उनकी पत्नी उमा ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया। छानबीन समिति ने 5 अक्टूबर 2023 को निर्णय लिया, जिसमें उमा राजपूत को सहायक केमिस्ट के पद पर नियुक्त किया गया।
बहरहाल फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद कोई भी परिवार का सदस्य सामने नहीं आ रहा और इस पूरे मामले में एक बात तो साफ है कि इस फर्जीवाड़े के खेल में विभाग के कई अधिकारियों की मिलीभगत है। इस कारण एक कर्मचारी की मौत के बदले परिवार के तीन लोगों को सरकारी नौकरी दे दी।


