लोकमतसत्याग्रह/साइबरपीस फाउंडेशन के महत्वकांक्षी ई-कवच पहल के तहत डेलनेट, रीसिक्योरिटी और ऑटोबोट इन्फोसेक के सहयोग से साइबर खतरों और डिजिटल जोखिमों की तलाश नामक अध्ययन किया गया है। इसकी रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई। इसमें बताया गया कि नौ महीनों में दो लाख से अधिक बार साइबर हमलों और जानकारी में सेंध लगाने की करीब चार लाख कोशिशें हुई हैं।
भारतीय शिक्षण संस्थानों पर पिछले नौ महीने में दो लाख से अधिक साइबर हमले हुए हैं, जबकि करीब चार लाख डाटा में सेंधमारी की कोशिश की गई। यह खुलासा साइबरपीस फाउंडेशन के अध्ययन में हुआ है।
अध्ययन का मकसद, उच्च शिक्षण संस्थानों, छात्रों, शिक्षकों समेत कर्मियों को अधिकारिक ईमेल, डाटा को सुरक्षित रखने के लिए जागरूक करना है। फाउंडेशन के महत्वकांक्षी ई-कवच पहल के तहत डेलनेट, रीसिक्योरिटी और ऑटोबोट इन्फोसेक के सहयोग से साइबर खतरों और डिजिटल जोखिमों की तलाश नामक अध्ययन किया गया है। इसकी रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई। इसमें बताया गया कि नौ महीनों में दो लाख से अधिक बार साइबर हमलों और जानकारी में सेंध लगाने की करीब चार लाख कोशिशें हुई हैं।
सेंधमारी की आशंका पांच गुना अधिक
सल, यहां मजबूत साइबर सुरक्षा वाले समकक्षों की तुलना में जानकारी में सेंधमारी की संभावना पांच गुना अधिक हैं। क्योंकि उल्लंघनों से संकाय का प्रतिरूपण, जासूसी करने के लिए हमले, डीपफेक सामग्री, संवेदनशील शोध डेटा की चोरी और परीक्षा पत्रों का लीक हो सकते हैं। इसलिए समय-समय पर पासवर्ड बदलने और मोबाइल में भी कोई भी ऐप डाउनलोड न करने की अपील की गई। इसके अलावा पासवर्ड अपने नाम और जन्मतिथि के आधार पर न रखने की भी सलाह जारी हुई है।
कमजोर पासवर्ड है कारण
अध्ययन जुलाई, 2023 से अप्रैल, 2024 के बीच किया गया था। इसमें आठ हजार से अधिक विशिष्ट यूज़रनेम और 54,000 विशिष्ट पासवर्ड ‘ब्रूट-फोर्स’ हमलों में इस्तेमाल किए जा रहे थे। आमतौर पर लक्षित यूजरनेम में ‘रूट’ और ‘एडमिन’ शामिल थे। जबकि ‘123456’ और ‘पासवर्ड’ जैसे कमजोर पासवर्ड का अक्सर इस्तेमाल किया जा रहा था।


