राज्यसभा ने तीन अहम विधेयकों को संयुक्त समिति को भेजने का प्रस्ताव मंजूर किया। इनमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को गंभीर अपराधों में 30 दिन से अधिक जेल में रहने पर पद से हटाने का प्रावधान भी शामिल है। गृह मंत्री अमित शाह ने यह प्रस्ताव सदन में पेश किया। अब समिति के सदस्य इन विधेयकों की समीक्षा कर शीतकालीन सत्र में रिपोर्ट पेश करेंगे।
राज्यसभा ने गुरुवार को तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को संयुक्त समिति (जॉइंट कमेटी) को भेजने का प्रस्ताव मंजूर कर दिया। इन विधेयकों में वह प्रावधान भी शामिल है, जिसके तहत अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री गंभीर आपराधिक मामलों में 30 दिनों से अधिक समय तक जेल में रहते हैं, तो उन्हें पद से हटाया जा सकेगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में ‘मोषन फॉर रेफरेंस ऑफ बिल्स टू जॉइंट कमेटी’ पेश किया। इस प्रस्ताव में तीन विधेयक शामिल थे। भारत के संविधान में संशोधन का बिल, सरकार के केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम 1963 से जुड़ा संशोधन बिल और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 से जुड़ा संशोधन बिल। इन तीनों को लेकर राज्यसभा ने सहमति जताई कि इन्हें और विस्तार से देखने के लिए संयुक्त समिति को भेजा जाए।
लोकसभा ने पहले ही दिया था मंजूरी का रास्ता
इन तीनों बिलों को अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में पेश किया था। लोकसभा ने भी इन पर चर्चा के बाद इन्हें संयुक्त समिति को भेजने का प्रस्ताव पारित किया। समिति में कुल 31 सदस्य होंगे, जिनमें 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा से होंगे। अब समिति को इन विधेयकों की गहन समीक्षा करने और रिपोर्ट पेश करने का दायित्व सौंपा गया है।
सर्दियों के सत्र में पेश होगी रिपोर्ट
निर्णय के मुताबिक, यह संयुक्त समिति अपनी रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र में पेश करेगी। शीतकालीन सत्र नवंबर के तीसरे सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। इस दौरान समिति को विधेयकों के कानूनी, संवैधानिक और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत अध्ययन करना होगा। खासकर इस प्रावधान पर ध्यान रहेगा कि यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री गंभीर आपराधिक मामले में जेल जाता है तो उसकी स्थिति क्या होगी।
हंगामे के बीच हुआ प्रस्ताव पारित
राज्यसभा में यह प्रस्ताव शोर-शराबे और विपक्षी हंगामे के बीच पारित हुआ। कई विपक्षी दलों ने विधेयकों पर सवाल उठाए, लेकिन अंततः सदन ने बहुमत से इसे मंजूरी दे दी। सरकार का कहना है कि ये विधेयक लोकतंत्र को और मजबूत करेंगे तथा जवाबदेही तय करेंगे। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि भाजपा सरकार इन कानूनों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने में कर सकती है। अब निगाहें समिति की रिपोर्ट पर टिकी रहेंगी, जिससे इन बिलों का भविष्य तय होगा।


