‘नहीं सुनते साहब’: आखिर क्यों MLA-मंत्रियों से बढ़ रहा अफसरों का टकराव, मंच तो कभी बैठक में CM तक पहुंचा दर्द

लोकमतसत्याग्रह/मोहन सरकार के दो साल पूरे होने पर अफसरशाही पर सवाल उठने लगे हैं। कई मंत्री व विधायक अफसरों के फोन न उठाने, बैठकों में अनुपस्थिति और काम न सुनने की शिकायत कर रहे हैं। खाद वितरण सहित कई मुद्दों पर टकराव हुआ। मुख्यमंत्री तक शिकायतें पहुंचीं, विपक्ष ने भी अफसरों की मनमानी पर निशाना साधा।

मध्यप्रदेश की मोहन सरकार के दो साल पूरे हो गए हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव को अभी तक कोई बड़ी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन प्रदेश में बढ़ रही अफसरशाही की अब चर्चा होने लगी है। विधायक तो ठीक, मोहन सरकार के कई मंत्री सार्वजनिक तौर पर अफसरों के बेलगाम होने और काम नहीं सुनने की शिकायत कर चुके हैं। जनप्रतिनिधियों की नाराजगी व समन्वय के लिए सरकार और संगठन में व्यवस्थाएं हैं। बड़े जिलों में प्रभारी मंत्री नियुक्त हैं और भाजपा संगठन ने संभाग स्तर पर प्रभारी सत्ता व संगठन के बीच समन्वय का काम देखते हैं। इसके बावजूद अफसर व जनप्रतिनिधियों का आमने-सामने होना कई सवाल खड़े कर रहा है।  

13 सितंबर 2023 में मोहन सरकार प्रदेश में काबिज हुई थी और बड़ी घटनाओं पर जिस अंदाज में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अफसरों के खिलाफ एक्शन लिया था तो यह लग रहा था कि सरकार के फैसलों में अब अफसरों का ज्यादा दखल नहीं रहेगा। लेकिन, हाल ही में ग्वालियर के मामले में मंत्री प्रद्युन्न सिंह तोमर ने अफसरों की शिकायत की और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट को भी उनकी हां में हां मिलाना पड़ी। इस वाकये से यह चर्चा होने लगी है कि क्या वाकई अफसर मंत्रियों-विधायकों को तवज्जों नहीं दे रहे हैं? जनप्रतिनिधियों के कॉल रिसीव न करने, बैठकों की जानकारी नहीं देने जैसे मामले कई बार सामने आ चुके हैं। खाद के मुद्दे पर भी विधायकों व अफसरों में कुछ जिलों में विवाद सामने आए हैं।

आखिर क्यों नाराज हैं जनप्रतिनिधि

  • मध्य प्रदेश में 55 जिले हैं। कुल 32 मंत्रियों को इन जिलों का प्रभार दिया गया है। ज्यादातर मंत्रियों को दो जिले दिए गए हैं।
  • इंदौर जिला मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पास रखा है, जबकि भोपाल चैतन्य कश्यप, जबलपुर, देवास जगदीश देवड़ा को दिया है। धार जिला प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय हैं।
  • एक साथ दो जिले होने के कारण प्रभारी मंत्री जनप्रतिनिधियों से ज्यादा संपर्क में नहीं रह पाते। जिला योजना समिति व अन्य बैठकों में जनप्रतिनिधि अपनी बात रखते हैं, लेकिन ये बैठकें भी समय पर नहीं होतीं। इसके चलते फिर जनप्रतिनिधि और अफसरों में टकराव के हालात बनते हैं।
  • कई जिलों में खाद के वितरण को लेकर जनप्रतिनिधि नाराज हैं, क्योंकि इसकी अव्यवस्था उनके वोटबैंक को प्रभावित करती है। इसके चलते मुख्यमंत्री मोहन यादव को कई जिलों के कलेक्टर को हिदायत देना पड़ी कि अव्यवस्था फैली तो फिर वे दूसरे जिलों में जाने के लिए तैयार रहें।

मंत्री विजयवर्गीय को मंच से कहना पड़ा
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की गिनती तेज तर्रार मंत्रियों में होती है। अफसरों से कैसे काम कराना है, यह उन्हें पता है, लेकिन इंदौर में 50 लाख पौधों लगाने के लिए उन्हें मंच से मुख्यमंत्री को कहना पड़ा था कि वन विभाग के अफसर इस मामले में मदद नहीं कर रहे हैं। आप उन्हें निर्देश देकर जाएं। हाल ही में निगमायुक्त से कलेक्टर बने शिवम वर्मा को लेकर भी विजयवर्गीय को एक बार मंच से कहना पड़ा था कि- हमारे कमिश्नर (शिवम वर्मा) से भी मैं सीखता हूं। काम के लिए इन्हें फोन लगाते हैं तो जी सर, सर-सर करते हैं। काम हो या नहीं, लेकिन ये हां तो कर ही देंगे।

मुख्यमंत्री तक पहुंचा रहे मंत्री अफसरों की शिकायत
अफसरों के रवैए से परेशान मंत्री अब कैबिनेट बैठक में अफसरों की शिकायत मुख्यमंत्री से कर रहे हैं। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में मंत्री प्रद्युमन सिंह ने हा था कि ग्वालियर में हालत खराब हैं। अफसर सुनते नहीं हैं। ग्वालियर के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट ने भी मुख्यमंत्री के सामने यह बात स्वीकारी थी। राजस्व मंत्री करण सिंह ने भी मुख्यमंत्री मोहन यादव से तबादलों को लेकर शिकायत की थी।

भोपाल निगमायुक्त नहीं उठाते जनप्रतिनिधियों के फोन
भोपाल नगर निगम के कमिश्नर हरेंद्र नारायण पर जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाने के आरोप अक्सर लगते हैं। भोपाल जिला विकास समन्वय व निगरानी समिति की बैठक में कमिश्नर शामिल नहीं हुए। उन्हें सांसद आलोक शर्मा ने फोन किया तो उनका फोन भी नहीं उठाया। भोपाल की एक बस्ती में लगी आग बुझाने के लिए पार्षद ने उन्हें फोन लगाया तब भी उन्हें कॉल रिसीव नहीं किया। मंत्री विश्वास सारंग को उन्हें कहना पड़ा कि आप कॉल उठा लेते तो टैंकर जल्दी पहुंच जाते।

मंत्री से हो चुकी है चर्चा
मंत्री प्रद्युमन सिंह ने अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाई है। प्रभारी मंत्री होने के नाते मैंने भी वस्तुस्थिति से उन्हें अवगत कराया है। मंत्री तोमर से मेरी चर्चा हो चुकी है। -तुलसी सिलावट, जल संसाधन मंत्री, मध्य प्रदेश

विधायकों से गुप्त पत्र मंगवाएं, हकीकत पता चल जाएगी
प्रदेश में विधानसभा ही ठीक से नहीं चलने दी जाती है। अपनी बात जनप्रतिनिधि फिर कहां रखें। अफसरों के रवैए को लेकर जनप्रतिनिधि और जनता नाराज है। अब तो सरकार के मंत्री और विधायक खुलकर अफसरों की शिकायत कर रहे है। यह गंभीर स्थिति है। सरकार विधायकों के गुप्त पत्र सरकारी कामकाज के बारे में मंगवा कर देखें। मैदानी स्थिति पता चल जाएगी। अफसर मनचाहे विभाग और शहरों में सेटिंग कर तबादले करवा रहे हैं। उन्हें किसी बात का अब डर नहीं बचा। -जीतू पटवारी, कांग्रेस, प्रदेशाध्यक्ष

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