चीन-थाईलैंड से आने वाली सस्ती टीबी की दवाओं की भारत ने शुरू की जांच, लगा सकता है एंटी-डंपिंग शुल्क

भारत ने चीन और थाईलैंड से टीबी यानी तपेदिक रोधी दवाओं में इस्तेमाल होने वाले दवा रसायन ‘एथमब्यूटोल हाइड्रोक्लोराइड’ के आयात की डंपिंग जांच तेज कर दी है। व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर ) ने सोमवार को इस जांच से जुड़े सभी पंजीकृत पक्षों की सूची जारी की। बता दें कि देशों से आ रहा सस्ते रसायन के चलते भारतीय कंपनियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा था। 

डीजीटीआर ने यह जांच बीते महीने भारतीय दवा निर्माता ल्यूपिन लिमिटेड के याचिका दायर करने के बाद शुरू की थी। इस याचिका में ल्यूपिन ने आरोप लगाया था कि चीन और थाईलैंड से आयात होने वाला यह रसायन बहुत कम कीमत पर बेचा जा रहा है, जिससे भारतीय कंपनियों को नुकसान हो रहा है। यह जांच भारत के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसके तहत वह घरेलू उद्योगों को अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से बचाने की कोशिश कर रहा है। डीजीटीआर ने सितंबर में ही ग्लास फाइबर और स्टील से लेकर सौर सेल और रासायनिक उत्पादों तक कई अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसी डंपिंग प्रथाओं की 15 अंतिम निष्कर्ष रिपोर्टें जारी कीं।

डीजीटीआर ने सोमवार को जारी बयान में ल्यूपिन लिमिटेड को देशी उद्योग का प्रतिनिधि बताया और चीन की वुहान वुयाओ फार्मास्युटिकल्स को विदेशी निर्माता के रूप में नामित किया। एजेंसी ने कहा कि डंपिंग और नुकसान के सबूत मिले हैं, क्योंकि ये आयातित उत्पाद भारतीय कीमतों से कम पर बेचे जा रहे हैं।

यह जांच अप्रैल 2024 से मार्च 2025 की अवधि के आंकड़ों को कवर करेगी। अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि भारतीय कंपनियों को नुकसान हुआ है, तो सरकार चीन और थाईलैंड से आयात पर एंटी-डंपिंग शुल्क लगा सकती है।

दिलचस्प बात यह है कि सितंबर में ही डीजीटीआर ने 13 नए एंटी-डंपिंग और सब्सिडी जांच मामले शुरू किए, जिनमें ज्यादातर चीन और दक्षिण कोरिया से होने वाला आयात शामिल हैं। इससे साफ है कि भारत अब अपने घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए तेजी से कदम उठा रहा है।

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