लोकमतसत्याग्रह/मुरार के सट्टेबाज और ठगों द्वारा 57.70 लाख रुपए ठगे जाने से प्रताड़ित युवक ने सिरोल क्षेत्र में आत्महत्या कर ली थी। उसकी मौत के 26 दिन बाद पुलिस ने उसकी मौत के जिम्मेदारों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर ली है। उसने आठ लोगों को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया था। जिसमें सबसे बड़ा कारण मुरार के दो सट्टेबाजों को बताया। जिन्होंने पहले सट्टे की लत लगाई। फिर सट्टा हारता गया तो उसे रुपए वापस देने के लिए प्रताड़ित करने लगे। करीब 35 लाख रुपए तो सिर्फ सट्टे में ही हार गया था।
फांसी लगाकर आत्महत्या, आठ लोगों को बताया जिम्मेदार
यह घटना बताती है कि ग्वालियर में क्रिकेट पर सट्टे की जड़ें कितनी गहरी हैं फिर भी पुलिस इस जड़ पर वार नहीं करती। यही वजह है कि क्रिकेट पर सट्टा खिलाने वाले बेखौफ होकर पूरा नेटवर्क चला रहे हैं और अब लोगों की जान तक जा रही है। सिरोल के हुरावली स्थित ए-ब्लाक में रहने वाले 29 वर्षीय मनीष राजपूत ने 29 अक्टूबर को रात करीब नौ बजे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस को उसके कमरे से दो पेज का सुसाइड नोट मिला था। जिसमें उसने आठ लोगों को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया था।
सुसाइड नोट में मनीष ने लिखा था- इन लोगों ने सरकारी नौकरी के नाम पर रुपए लिए। फिर मुरार के दो सट्टेबाजों का नाम लिखा। सुसाइड नोट की जांच पुलिस ने करवाई। रिपोर्ट में सामने आया कि यह लिखावट मनीष की ही है। इसके बाद पुलिस ने सुसाइड नोट और मृतक के स्वजनों के बयानों के आधार पर आरोपितों पर आत्महत्या के लिए उकसाने की एफआइआर दर्ज की।
सुसाइड नोट में जिक्र… भोलू मंडेलिया और मुरार के मुकुल ने सट्टे की लत लगाई, 35 लाख रुपए हरवाए
मुरार में सट्टेबाज भोलू मंडेलिया और मुकुल कुमार का नाम लिखा है। इसमें लिखा है कि भोलू मंडेलिया ने सट्टे की लत लगाकर करीब 25 लाख रुपए और मुकुल कुमार ने करीब 10 लाख रुपए सट्टे में हरवाए। इन दोनों ने ही सबसे ज्यादा प्रताड़ित किया।
इनके भी नाम, किसने कितने रुपए हड़पे
- महावीर उर्फ कल्लू यादव निवासी बड़ागांव मुरार – 3 लाख रुपए
- मनीष सोनवार निवासी वंशीपुरा, मुरार – 3.70 लाख रुपए
- राहुल चौधरी निवासी मुरार – 2 लाख रुपए
- सतेंद्र धाकड़ निवासी मरसेनी, दतिया – 3 लाख रुपए
- हेमंत राजपूत निवासी मैथाना महाराजपुरा – 1 लाख रुपए
शहर में क्रिकेट पर सट्टे का हब मुरार है। मुरार में कभी बाइक पर घूमने वाले सट्टेबाज करोड़ों रुपए की संपत्ति के मालिक बन चुके हैं। अब कारोबारी बनकर सट्टे का नेटवर्क चला रहे हैं।


