50 हजार की धरम और पांच दिन का इंतजार तय करेगा दोषी कौन? पंचों ने भरवाया पंचनामा; जानें पूरा मामला

लोकमतसत्याग्रह/मां और पिता दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाया, जिसके बाद पंचों की मौजूदगी में सभी संदेही रिश्तेदारों ने महादेव के गर्भगृह में कसम उठाई कि उनका घटना में कोई हाथ नहीं है। अदालत ने 50 हजार का ‘धरम’ तय किया है, जिसके तहत पांच दिन के भीतर किसी भी पक्ष को बड़ा नुकसान होने पर दोषी माना जाएगा।

ग्वालियर के मोहनपुर गांव इलाके से बीते एक महीने से तीन साल का मासूम रितेश पाल लापता है। उसकी इस अपहरण मिस्ट्री को सुलझाने की जिम्मेदारी अब मजिस्ट्रेट महादेव को सौंपी गई है। पुलिस से उम्मीद टूटने के बाद मजिस्ट्रेट महादेव की आदलत ने परिजनों को फैसला सुनाया है।

दरअसल महाराजपुरा स्तिथ गिरगांव में महादेव का प्राचीन मंदिर है। ग्वालियर चंबल अंचल में इन्हें मजिस्ट्रेट महादेव कहा जाता है और मजिस्ट्रेट महादेव के परिसर में लगती है उनकी अदालत। कौन दोषी होगा? किसे मिलेगा न्याय? ये सब सुनवाई के बाद तय होता है। मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत में इस बार 03 साल के मासूम रितेश पाल के अपहरण की अनसुलझी गुत्थी का मामला पहुंचा। मजिस्ट्रेट महादेव की आदलत में सुनवाई के लिए रितेश के पिता पक्ष और मां पक्ष के लोग भी पहुंचे। मंदिर की मान्यता के तहत मंदिर के मौजूदा पंचों ने दोनों पक्षों को सुना। मां सपना का आरोप है कि रितेश के पिता जसवंत पाल ने ही उसका अपहरण या कोई अनहोनी घटना की है। वहीं पिता जसवंत ने मां सपना और उसके भाई सहित अन्य परिवारजनों पर वारदात करने का आरोप लगाया।

पंचों के सामने पेश हुए दोनों पक्ष
लगभग 03 घंटे तक चली मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों को सुना गया। छोटी-छोटी नोकझोंक के बीच वक्त आया मंदिर की मान्यताओं को निभाने का। जिसके तहत मजिस्ट्रेट महादेव के दरबार यानी गर्भगृह में दोनों पक्षों को पंचों की मौजूदगी में पेश किया गया। मासूम रीतेश पाल की मां सपना, मामा, मामी के अलावा पिता जसवंत, दादा सहित संदेही रिश्तेदारों ने महादेव की धरम यानी कसम उठाई। दोनों ने कसम उठाते हुए कहा कि मासूम रितेश पाल के अपहरण या कोई भी घटना कारित करने, उसमे मदद करने में उनका कोई हाथ नहीं है। हालांकि दोनों पक्षों के द्वारा उठाई गई कसम से फिलहाल अभी यह साफ नहीं हो सका है कि आखिर रीतेश कहां है।

मां बोली- मजिस्ट्रेट महादेव पर भरोसा
रीतेश की मां सपना पाल का कहना है कि पुलिस एक महीना बीत जाने के बाद भी उनके बच्चे को खोज नहीं पाई है। ऐसे में पुलिस से उम्मीद खत्म होने के बाद मजिस्ट्रेट महादेव पर भरोसा किया है। महादेव के दरबार में उठाई गई कसम तय करेगी कि कौन लोग रितेश के अपहरण में दोषी या सहयोगी हैं। वहीं पिता जसवंत पाल का कहना है कि मजिस्ट्रेट महादेव ही अब न्याय करेंगे। दोनों पक्षों ने जो आरोप एक दूसरे पर लगाया, उसके बाद सभी ने पंचों की मौजूदगी कसम उठाई। यदि किसी ने भी झूठी कसम उठाई तो सजा का फैसला मजिस्ट्रेट महादेव करेंगे।

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