केंद्र सरकार की ओर मनरेगा का नाम बदलने को लेकर विधेयक पेश किया गया है। हालांकि, इस विधेयक के जरिए मनरेगा के पुराने बिल को भी खत्म कर दिया जाएगा। पेश किए गए बिल में अब श्रमिकों को 100 की जगह 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है। वहीं, इस बिल में राज्यों से योजना का 40 फीसदी खर्च उठाने को कहा गया है।केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा का नाम बदलने के लिए लोकसभा में लाए गए बिल का विपक्ष की ओर से खुलकर विरोध किया जा रहा है। विपक्ष इसे महात्मा गांधी का अपमान बताने के साथ दावा कर कर रहा है कि यह मनरेगा को खत्म करने की साजिश है।
सीपीआई सांसद पी. संतोष कुमार ने कहा, ‘यह महात्मा गांधी की स्मृति का घोर अपमान है। जी राम का अर्थ है ‘गोडसे राम’। इसका क्या अर्थ है? क्या महात्मा गांधी का नाम विकसित भारत के मार्ग में बाधा है? सरकार को इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए। मनरेगा देश की सबसे लोकप्रिय योजना है, लेकिन वे इसे खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘पूरा देश, पूरी ग्रामीण आबादी हमारे साथ है। संसद सत्र समाप्त होने के बाद भी इसके खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा। यह जी राम जी नहीं, ‘गोडसे राम’ विधेयक है। इसे स्थायी समिति को भेजा जाना चाहिए।’
जॉन ब्रिटास ने कहा, ‘सरकार की योजना इस कार्यक्रम को कम करके बंद करने की है। करोड़ों मजदूर इससे प्रभावित होंगे। इसके अलावा, इसे सरकार के भत्ते के रूप में देखा जा रहा है। पहले से ही धन की कमी से जूझ रहे राज्यों पर 50,000 करोड़ रुपये का बोझ डाला जा रहा है। हम इस कानून का पुरजोर विरोध करेंगे।’
इस मामले पर डीएमके नेता टीकेएस एलंगोवन ने कहा, ‘केंद्र ने कहा है कि राज्यों को 40 फीसदी खर्च उठाना चाहिए। आयकर राजस्व का क्या हुआ? यह एक बेकार सरकार है जिसे देश से बाहर निकालना होगा; तभी देश समृद्ध होगा। भारत मोदी, ट्रंप और ऐसे अन्य लोगों के हाथों का गुलाम बन जाएगा। उनकी प्राथमिकता देश को हिंदू देश में बदलना है।’
इस विधेयक पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, ‘यह सरकार कितना नीचे गिर सकती है। ये हमारे राष्ट्रपिता का अपमान कर रहे हैं। गांधी जी राम राज्य चाहते थे, लेकिन इस तरह का जी-राम-जी नहीं जैसा यह सरकार सोच रही है। इन्होंने भगवान राम के नाम को कलंकित कर दिया है।’


