राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की जगह लगाई गई राजाजी की प्रतिमा, राष्ट्रपति मुर्मू ने किया अनावरण

लोकमत सत्याग्रह/राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी की मूर्ति का अनावरण किया। यह मूर्ति एडविन लुटियंस की जगह लगाई गई है। यह कदम गुलामी की मानसिकता को छोड़कर भारतीय नायकों को सम्मान देने का प्रतीक है। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति और कई केंद्रीय मंत्री भी शामिल हुए।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सोमवार को राष्ट्रपति भवन कल्चरल सेंटर में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की मूर्ति का अनावरण किया।

लुटियंस के मूर्ति की जगह लगाई गई प्रतिमा
राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि यह मूर्ति अशोक मंडप के पास बनी बड़ी सीढ़ियों पर लगाई गई है। यह मूर्ति वहां पहले से लगी एडविन लुटियंस की मूर्ति की जगह ली है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह बदलाव गुलामी की सोच को पीछे छोड़ने की एक कोशिश है। यह भारत की संस्कृति, विरासत और परंपराओं को गर्व के साथ अपनाने का तरीका है। साथ ही, यह उन महान लोगों को सम्मान देने का प्रयास है जिन्होंने अपने असाधारण योगदान से भारत माता की सेवा की।

राष्ट्रपति ने क्या कहा?
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि यह कदम देश के इतिहास को बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय नेताओं को पहचान देने की राष्ट्रीय कोशिश का प्रतीक है। सी. राजगोपालाचारी को लोग ‘राजाजी’ के नाम से जानते हैं। वे एक मशहूर स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता और विद्वान थे। उन्होंने 1948 से 1950 तक भारत के आखिरी गवर्नर-जनरल के रूप में काम किया था।

कार्यक्रम में कई नेता मंत्री रहे मौजूद
इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मौजूद रहे। सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन और राजाजी के परिवार के सदस्य भी वहां उपस्थित थे।

क्या बोले उपराष्ट्रपति?
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि वे आज ‘राजाजी उत्सव’ में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि लुटियंस की जगह राजाजी की मूर्ति लगाना गुलामी की निशानियों से दूर जाने की हमारी यात्रा का एक अहम पड़ाव है। यह कार्यक्रम दिखाता है कि सरकार राष्ट्रीय नायकों को सम्मान देने और देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रही है।

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