HDFC Bank में HDFC के विलय से भारत की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी बनेगी, मार्केट कैप 12.8 लाख करोड़ होने की उम्मीद

मर्जर के बाद HDFC Bank निफ्टी 50 इंडेक्स में वेट के लिहाज से सबसे बड़ा स्टॉक होगा, विलय के बाद यह RIL के 11.9 फीसदी के मौजूदा वेट से आगे निकल जाएगा HDFC and HDFC Bank merger:  HDFC के HDFC Bank में मर्जर के बाद मार्केट कैपिटलाइजेशन  के हिसाब से भारत की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी बनने का अनुमान है। एक्सचेंज को दी गई जानकारी में होम लोन देने वाली कंपनी ने … Continue reading HDFC Bank में HDFC के विलय से भारत की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी बनेगी, मार्केट कैप 12.8 लाख करोड़ होने की उम्मीद

जुलाई से पहले ब्रोकर आपको दोबारा सिप रजिस्ट्रेशन के लिए कह सकता है, जानिए क्यों

सेबी का मानना है कि कोई म्यूचुअल फंड डिस्ट्रिब्यूटर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, स्टॉक ब्रोकर या इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स इनवेस्टर्स का पैसा फंड हाउस को ट्रांसफर करने से पहले अपने बैंक अकाउंट में नहीं रख सकता। इसका मकसद पैसे के दुरुपयोग की संभावना खत्म करना है क्या आप स्टॉक ब्रोकर या ऑनलाइन डिस्ट्रिब्यूटर के जरिए म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में इनवेस्ट करते हैं। अगर हां तो आपका ब्रोकर … Continue reading जुलाई से पहले ब्रोकर आपको दोबारा सिप रजिस्ट्रेशन के लिए कह सकता है, जानिए क्यों

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा से बदलेगी बैंकिंग

वित्तीय क्षेत्र में आधुनिक दौर के अवसरों का लाभ उठाने और चुनौतियों से निपटने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और क्वान्टम कंप्यूटिंग जैसी तकनीक की बड़ी भूमिका होगी वित्तीय क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और क्वान्टम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों को अब ड्राइविंग सीट संभालनी होगी ताकि आधुनिक दौर के अवसरों और चुनौतियों, दोनों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। ग्राहकों के … Continue reading कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा से बदलेगी बैंकिंग

जानिए EPF में 2.5 लाख रुपये से ज्यादा के कॉन्ट्रिब्यूशन पर किस तरह लगेगा टैक्स, जानिए आपकी जेब पर क्या होगा असर

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने इस बारे में बताया है। उसने कहा है कि नए नियम के लागू होने के बाद दो अलग पीएफ अकाउंट्स रखने होंगे। पहला अकाउंट टैक्सेबल कंट्रिब्यूशन के लिए होगा। दूसरा अकाउंट नॉन–टैक्सेबल कंट्रिब्यूशन के लिए होगा  इंप्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) से जुड़ा टैक्स का नियम बदल गया है। अब एक वित्त वर्ष में EPF में 2.5 लाख रुपये … Continue reading जानिए EPF में 2.5 लाख रुपये से ज्यादा के कॉन्ट्रिब्यूशन पर किस तरह लगेगा टैक्स, जानिए आपकी जेब पर क्या होगा असर

1 अप्रैल से ब्याज का पैसा कैश में निकालने के बदलेंगे नियम, यहां जानें पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम अकाउंट से जुड़े नियम

1 अप्रैल 2022 से सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में टर्म डिपॉजिट और मंथली इनकम स्कीम (MIS) के नियम बदलने वाले हैं। सीनियर सिटिजन के लिए इन खातों से आने वाले ब्याज से जुड़े नियम में बदलाव किया गया है। अब इन योजनाओं पर मिलने वाला ब्याज आपको तभी मिलेगा, जब आपकी स्कीम सेविंग अकाउंट से लिंक होगी। अगर आप 31 मार्च तक लिंक नहीं कर … Continue reading 1 अप्रैल से ब्याज का पैसा कैश में निकालने के बदलेंगे नियम, यहां जानें पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम अकाउंट से जुड़े नियम

कंसोलिडेशन के मूड में शेयर बाजार, 2 सप्ताह से जारी रफ़्तार पर लगा ब्रेक

लगातार 2 सप्ताह तक मजबूती का प्रदर्शन करने के बाद भारतीय शेयर बाजार की रफ़्तार इस सप्ताह थमती हुई नजर आई। शुक्रवार को खत्म हुए कारोबारी सप्ताह में भारतीय बाजार कंसोलिडेट होते हुए नजर आए, जिसकी वजह से बीएसई का सेंसेक्स 501.73 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,362.20 अंक के स्तर पर और एनएसई का निफ्टी 134.05 अंक यानी 0.77 प्रतिशत की … Continue reading कंसोलिडेशन के मूड में शेयर बाजार, 2 सप्ताह से जारी रफ़्तार पर लगा ब्रेक

पेटीएम ने फिर बनाया गिरावट का नया रिकॉर्ड, 535.40 रुपये के स्तर पर पहुंचा शेयर

पेटीएम के शेयर ने कल  एक बार फिर ऑल टाइम लो का नया रिकॉर्ड बनाया। कंपनी के शेयर कल  535.40 रुपये के स्तर तक गिर गए। पेटीएम के शेयर में आ रही जोरदार गिरावट के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन 97 कम्युनिकेशन से स्पष्टीकरण मांगा था।  शेयर बाजार में रोज गिरावट का नया रिकॉर्ड बना रही कंपनी पेटीएम के शेयर … Continue reading पेटीएम ने फिर बनाया गिरावट का नया रिकॉर्ड, 535.40 रुपये के स्तर पर पहुंचा शेयर

EPFO: कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, जल्द पूरा करें ये काम, वरना अटक सकता है PF का पैसा

केंद्र सरकार ने सभी प्रोविडेंट फंड अकाउंट खाताधारकों के लिए ई–नॉमिनेशन फाइल करना अनिवार्य कर दिया है। नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। EPFO News: एम्पलाई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) के कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। 31 मार्च 2022 से पहले ई-नॉमिनेशन पूरा कर लें, वरना पीएफ का पैसा अटक सकता है। वही देरी पर ईपीएफओ के जरिए मिलने वाली कई सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ सकता … Continue reading EPFO: कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, जल्द पूरा करें ये काम, वरना अटक सकता है PF का पैसा

टैक्स सेविंग की 5 स्मार्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स, 8 दिन बाद नहीं मिलेगा मौका, जानिए कैसे उठा सकते हैं फायदा

टैक्स सेविंग की 5 स्मार्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स: आपको 31 मार्च से पहले इन्वेस्टमेंट और टैक्स सेविंग को लेकर स्मार्ट प्लानिंग करनी चाहिए. इसमें आप केवल अलग-अलग डिडक्शन का फायदा ही नहीं उठा सकते हैं, बल्कि आप किसी तरह से कैपिटल गेन को कैसे टैक्स फ्री कर सकते हैं टैक्स सेविंग की 5 स्मार्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स: फाइनेंशियल ईयर 2021-22 नजदीक आ गया है.ऐसे में आपको 31 मार्च … Continue reading टैक्स सेविंग की 5 स्मार्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स, 8 दिन बाद नहीं मिलेगा मौका, जानिए कैसे उठा सकते हैं फायदा

अपने पोर्टफोलियो को हाइब्रिड फंड के साथ बैलेंस करें, एक्सपर्ट से समझें निवेश से जुड़ी खास बातें

बाजार की चाल एक समान गति से नहीं होती, इसलिए हर व्यक्ति को उसके जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर निवेश करना चाहिए. हाल ही में हमने भारतीय शेयर बाजार (StockMarket) में सुधार का दौर देखा है. जानकारों के मुताबिक, सुधार का यह दौर अभी खत्म नहीं हुआ है. अगर ऐसा है भी, तो बाजार जल्द ही कंसोलिडेशन के दौर में प्रवेश करेगा, यह विश्लेषण निवेशकों और व्यापारियों के लिए निश्चित रूप से अनुकूल नहीं है. हालांकि निवेश के लिहाज से कंसोलिडेशन एक शानदार मौका है, लेकिन खुदरा निवेशकों के लिए यह मुश्किल हो सकता है. सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, धन की कमी. ज्यादातर खुदरा निवेशक जो कामकाजी लोग होते हैं, वे घबराहट में बिक्री शुरू कर देते हैं, जो पूंजी के नुकसान का कारण बनता है. अतः हाइब्रिड फंडों में SIP के जरिए निवेश करना बाजार के उतारचढ़ावों की परवाह किए बिना पैसा बनाने का सबसे अच्छा तरीका है. ये एसेट एलोकेशन और डायवर्सिफिकेशन के लिए सर्वोत्तम है. विशेषज्ञों के पैनल ने हाइब्रिड फंड के जरिए पोर्टफोलियो को संतुलित करने के बारे में बात की. श्रीनिवास खानोलकर, नेशनल सेल्स हेड, बैंक एवं एनडी, मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) प्रा. लिमिटेड, उन पैनलिस्टों में से एक थे. उन्होंने हाइब्रिड फंड की प्रकृति को परिभाषित किया. हाइब्रिड फंड क्या है? ‘जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, हाइब्रिड फंड विभिन्न प्रकार के एसेट क्लास का मिश्रण होते हैं. लेकिन, एसेट क्लास को विस्तृत रूप से विश्लेषित करने से पहले हम विभिन्न प्रकार के हाइब्रिड फंडों के बारे में बात करते हैं.  श्रीनिवास के अनुसार, पहले प्रकार के हाइब्रिड फंड को मल्टी-एसेट हाइब्रिड फंड के रूप में जाना जाता है. इस तरह के फंड में, निवेश को कई तरह की संपत्तियों जैसे इक्विटी, डेट और कमोडिटी आदि में लगभग समान अनुपात में आवंटित किया जाता है. श्रीनिवास ने आगे बताया “दूसरे प्रकार का फंड होता है, एग्रेसिव हाइब्रिड फंड. इसमें  निवेश का आवंटन इक्विटी की ओर अधिक प्रवृत्त (झुका) होता है. इसमें  लगभग 35% से 80% निवेश इक्विटी सेगमेंट में किया जाता है, जबकि बाकी को डेट में लगाया जाता है. तीसरे प्रकार के हाइब्रिड फंड को डायनेमिक एसेट एलोकेशन फंड के रूप में जाना जाता है, जहां फंड मैनेजर इक्विटी या डेट में पूरा 100% निवेश करने का फैसला करता है. यह सब वित्तीय मॉडल पर निर्भर करता है”. इन तीनों फंडों के अलावा, एक और प्रकार का हाइब्रिड फंड होता है, जिसे इक्विटी सेविंग फंड कहा जाता है. इस फंड में इक्विटी, डेट और आर्बिट्रेज (डेरिवेटिव मार्केट) एसेट क्लास में निवेश किया जाता है. हालांकि, एक अलग तरह का फंड और भी होता है जो मुख्य रूप से आर्बिट्राज एसेट क्लास में ही निवेश करता है, लेकिन इसे भी हाइब्रिड फंड कैटेगरी में ही गिना जाता है. एक अन्य पैनलिस्ट बजाज कैपिटल के मुख्य व्यवसाय अधिकारी उत्तम अग्रवाल ने बताया- ‘कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंडों में कम से कम छह से 18 महीने के लिए निवेश किया जाना चाहिए. एग्रेसिव हाइब्रिड फंडों में सर्वोत्तम समय सीमा दो से तीन सालहोती है. बाजार में उतारचढ़ाव के कारण बहुत कम समय में निवेश निकालने पर वांछित परिणाम नहीं मिलते हैं.’ पैनलिस्टों के अनुसार, लंबी अवधि के निवेश के मामलों में एसेट का आवंटन बेहद महत्वपूर्ण है, और यह व्यक्तिगत लक्ष्य के अनुसार अलग होता है. निवेश के जरिए ज़्यादा पैसा बनाने का आदर्श तरीका होता है, इक्विटी, कमोडिटी और डेट जैसे विभिन्न एसेट क्लास में निवेश करना सही है. श्रीनिवास कहते हैं, ‘बाजार की चाल के अनुसार पोर्टफोलियो की समयसमय पर समीक्षा करना, प्रॉफिट बुकिंग करना, और किसी भी एसेट क्लास में दोबारा निवेश करना हर निवेशक के लिए बहुत जरूरी है.” हाइब्रिड फंड एसेट एलोकेशन में कैसे मदद करता है? अग्रवाल के मुताबिक,’एसेट एलोकेशन दो तरह के होते हैं स्टेटिक एसेट एलोकेशन और डायनेमिक एसेट एलोकेशन. एग्रेसिव हाइब्रिड फंड में फंड मैनेजर के जरिए एसेट एलोकेशन का अनुपात बनाए रखा जाता है. उदाहरण के लिए, फंड मैनेजर कुल फंड का 25% डेट में और 75% इक्विटी में निवेश करने का फैसला करता इस बात की पूरी संभावना है कि वह इस अनुपात को बनाए रखेगा.’ उत्तम अग्रवाल ने बताया ‘दूसरी ओर, डायनामिक एसेट अलोकेशन में किसी निश्चित अनुपात में निवेश नहीं किया जाता, इसमें फंड मैनेजर बाजार के मापदंडों के आधार पर एसेट आवंटन की समीक्षा कर उसे संतुलित करता है. अगर नकद बाजार में लाभ ज़्यादा है, तो फंड मैनेजर डेट में निवेश को कम कर देता है और इक्विटी सेगमेंट में बढ़ा देता है. इक्विटी मार्केट में प्रॉफिट बुकिंग के बाद, यथास्थिति अनुपात तक पहुंचने के लिए फंड को डेट एसेट्स में फिर से आवंटित करता है. आपको कौन सा हाइब्रिड फंड चुनना चाहिए? एसेट एलोकेशन इस बात पर तय होता है कि निवेशक का उद्देश्य क्या है? जहां तक विभिन्न एसेट क्लासेस में फंड आवंटन की बात है तो सभी के लिए एक पैमाना नहीं लगाया जा सकता है. बाजार की चाल एक समान गति से नहीं होती, इसलिए हर व्यक्ति को उसके जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर पैसा डालना चाहिए. युवा निवेशक अधिक जोखिम ले सकते हैं, और इसलिए उन्हें एग्रेसिव हाइब्रिड फंडों में निवेश करना चाहिए जो कि इक्विटी बाजार के सर्वोत्तम अवसरों को ध्यान में रख कर बनाए जाते हैं. इसके ठीक विपरीत, जोखिम से बचने वाले निवेशकों को कंज़र्वेटिव हाइब्रिड फंड चुनना चाहिए जिसमे डेट मार्केट में निवेश किया जाता हैं.’लोगों का झुकाव डायनेमिक एसेट एलोकेशन हाइब्रिड फंडों की तरफ ज्यादा है. श्रीनिवास खानोलकर का मानना है कि चूंकि इस प्रकार के फंड में बाजार से अधिकतम लाभ उठाने के लिए निवेश के तरीके को बदला जा सकता है, इसलिए यह एक स्थिर रिटर्न सुनिश्चित करता है. हाइब्रिड फंड में कर निर्धारण (टेक्सेशन) हाइब्रिड फंड में कर निर्धारण के नियम अन्य निवेशों पर लगाए गए कर निर्धारण के अनुसार ही होते हैं. एग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स से होने वाले लाभ पर इक्विटी टैक्सेशन स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है, जबकि कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड्स पर डेट टैक्सेशन स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है. इसे बेहतर ढंग से समझते हैं. निवेशकों को इक्विटी मार्केट में  लंबी अवधि (एक वर्ष से अधिक) के लाभ पर 10% और अल्पकालिक लाभ पर 15% कर का भुगतान करना होगा. हालांकि,1 लाख रुपये तक की टैक्स छूट है. एग्रेसिव हाइब्रिड फंड से मिलने वाले लाभ पर भी यही नियम लागू होता है. वहीं, दूसरी तरफ, डेट फंड से अर्जित लंबी अवधि (3 वर्ष से अधिक) के ब्याज पर 20% दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर लगाया जाता है. अगर कोई डेट फंड में दो साल से कम समय तक पैसा निवेश करे रहता है, तो इस अवधि के दौरान अर्जित ब्याज को अन्य स्रोतों से आय माना जाएगा. इसे निवेशक की प्रति वर्ष आय में जोड़ा जाएगा और आयकर स्लैब के अनुसार कर लगाया जाएगा. Continue reading अपने पोर्टफोलियो को हाइब्रिड फंड के साथ बैलेंस करें, एक्सपर्ट से समझें निवेश से जुड़ी खास बातें