लोकमत सत्याग्रह/Green Firecrackers: ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे हैं जिन्हें सामान्य पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है।
ग्वालियर। ग्रीन पटाखे कैसे होते हैं, हकीकत में यह खरीदारों ही नहीं विक्रेताओं को भी नहीं पता है। ग्राहक बोलकर ग्रीन पटाखा मांगता है और विक्रेता एक लोगो दिखाकर ग्रीन पटाखे थमा देता है। अब यह चलने के बाद ग्रीन है या रेड यह कोई देखने वाला नहीं है।
खुद आतिशबाजी बेचने वालों को भी इतनी समझ नहीं है कि ग्रीन पटाखों पर एक लोगो आता है जिसपर ग्रीन क्रैकल्स लिखा होता है, इसके अलावा कोई जानकारी नहीं है। जबिक काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंजीनियरिंग रिसर्च के अनुसार ग्रीन पटाखों पर ग्रीन पटाखे का लोगो ही नहीं उस पर एक बारकोडिंग भी की जाती है जिसे स्कैन करने के बाद कंपनी व फर्म की पूरी डिटेल सामने आती है।
इसमें टिन नंबर भी होता है। इसके बाद ही माना जाता है कि पटाखा ग्रीन श्रेणी में है। हकीकत में आतिशबाजी बाजार में पटाखे की पैकिंग में ग्रीन का लोगो छापकर बिक्री की जा रही है, कई ब्रांड में कोई बारकोडिंग नहीं है। नईदुनिया ने मंगलवार को आतिशबाजी बाजार में यह पड़ताल की जिसमें ग्रीन पटाखों को लेकर कोई स्पष्टता नहीं मिली। वहीं प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अभी इसको लेकर अलर्ट ही नहीं है।
यह होते हैं ग्रीन पटाखे
बता दें कि ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे हैं जिन्हें सामान्य पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है। इनमें कुछ हानिकारक रसायनों और उत्सर्जन को कम करने पर ध्यान दिया जाता है। सीएसआईआर व नीरी ने ग्रीन पटाखों के लिए एसडब्यूएस, एसएएफएएल और एसटीएआर जैसी कैटेगरी तैयार की हैं। इनका उद्देश्य पटाखों से निकलने वाले धुएं और हानिकारक उत्सर्जन को कम करना है। ग्रीन पटाखों में सल्फर की मात्रा सीमित होती है।
क्यूआर कोड : यह होता है चेक तभी मान्य ग्रीन पटाखा
पटाखों के पैकेट पर दिया गया क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद निर्माता का नाम, सीएसआईआर-नीरी का रजिस्ट्रेशन नंबर, पीईएसओ लाइसेंस, प्रोडक्ट का बैच नंबर और टेस्ट सर्टिफिकेट जैसी जानकारियां सामने आती हैं। इससे पटाखा बनाने वाली कंपनी, उसके सर्टिफिकेशन, जरूरी सुरक्षा मंजूरी और प्रोडक्ट की टेस्टिंग से जुड़ी जानकारी मिलती है। इसके अलावा, क्यूआर कोड से मिलने वाले डिटेल्स को पैकेट पर छपी जानकारी से भी मैच करें। ध्यान रखें कि सिर्फ हरे रंग का लोगो या क्यूआर कोड होना असली ग्रीन पटाखे की गारंटी नहीं है।
दुकानदार बोला- यह लोगो लगा है यही माना जाता है ग्रीन पटाखा
नईदुनिया टीम ने मेला आतिशबाजी बाजार में दुकानदारों से बात की और आतिशबाजी के पैकेट उठाकर पूछा क्या यह ग्रीन पटाखा है। दुकानदार ने कहा कि एक ग्रीन क्रैकल्स लिखा साइन बना होगा वही ग्रीन पटाखा माना जाता है यह तीन चार साल से आ रहा है। सभी पटाखे शिवाकाशी से आते हैं।
टीम ने पूछा कि किसी पर सिर्फ लोगो व किसी पर क्यूआर कोड नहीं यह क्या है तो इसकी दुकानदार को कोई जानकारी नहीं थी। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसा भी स्टाक था जिसपर ग्रीन पटाखे का लोगो तो छोड़े कहां से बनकर आए हैं यह तक नहीं था।
विभाग की ओर से सैंपलिंग की जाती है
ग्रीन पटाखों को लेकर त्यौहार पर अभियान चलाया जाता है, इस बार पटाखों को लेकर अलग से कोई गाइडलाइन तो नहीं आई है। विभाग की ओर से सैंपलिंग भी की जाती है ग्रीन पटाखों को लेकर चेक भी कराया जाएगा। – संजय जैन, क्षेत्रीय अधिकारी, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ग्वालियर

