ग्वालियर में सरकारी जमीन पर कब्जा, 40 मकानों पर एक्शन के लिए बुलडोजर लेकर पहुंचा प्रशासन, महिलाओं ने दी मशीन के आगे लेटने की धमकी

लोकमत सत्याग्रह/ जांच में 1076 वर्गफीट निजी जमीन के नाम पर 20 हजार वर्गफीट से ज्यादा सरकारी जमीन बेचने का फर्जीवाड़ा सामने आया है।/

ग्वालियर। शुक्रवार को काला सैयद बेलदार पुरा में सरकारी जमीन पर बने 40 से अधिक मकानों को तोड़ने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम की टीम दलबल और मशीनों के साथ मौके पर पहुंची। जिसके बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और मामले से जुड़े सभी परिवार सड़कों पर अपने-अपने घरों के दस्तावेज लेकर उतर आए।

मौके पर महिलाओं ने बैकहो लोडर मशीन के आगे लेटने की धमकी भी दी। यहां पता चला कि कोर्ट में यह मामला विचाराधीन है और कोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। इसके बाद रजिस्ट्रियों की जांच कर व रिकॉर्ड लेकर अधिकारी लौट आए।

यहां जांच में खुलासा हुआ कि 1076 वर्गफीट जमीन थी जिसे कई बार बेचा गया और 20 हजार वर्गफीट से ज्यादा पर कब्जे दिए गए। मौके पर कार्रवाई के लिए एसडीएम नरेंद्रबाबू यादव, तहसीलदार मनीष जैन सहित अधिकारीगण पहुंचे थे।

ये है पूरे फर्जीवाड़े का मामला

दरअसल यह पूरा मामला ग्वालियर गिर्द तहसील के ग्राम कोटा लश्कर का है। जिसमें मौजूद सर्वे क्रमांक 1887 और 1889 शासकीय भूमि पर बने 40 से अधिक मकानों से जुड़ा है, जिन्हें तोड़ने की कार्यवाही की जानी थी। प्रशासन ने इन सर्वे क्रमांक पर बने मकानों को हटाने के लिए हालांकि बीते चार महीने पहले नोटिस भी जारी किए थे, इसलिए राजस्व भू अभिलेख में जमीन शासकीय दर्ज होने के कारण कार्रवाई के लिए प्रशासन की टीम पहुंची थी। जिसके बाद इस पौने दो बीघा जमीन पर हुए फर्जीवाड़े का खुलासा परत दर परत हुआ।

जांच में सामने आया कि ग्राम कोटा लश्कर के सर्वे क्रमांक 1887 और 1889 की भूमि को मध्य प्रदेश भू सीमा अधिनियम 1960 के तहत सीलिंग के माध्यम से 1992 में शासकीय किया गया था। जबकि शासकीय सर्वे क्रमांक 1887 और 1889 में आरोपी कॉलोनाइजर के द्वारा निजी भूमि बता कर बेचा गया, जबकि कॉलोनाइजर की भूमि सर्वे क्रमांक 1890/1 में मात्र 1076 वर्गफुट मौजूद थी।

1076 फीट की जगह 20 हजार फीट बेच दी

सर्वे क्रमांक 1890/1 में जो निजी भूमि थी उसका क्षेत्रफल 1076 स्क्वायर फीट था, लेकिन कॉलोनाइजर ने फर्जीवाड़ा कर कई लोगों को रजिस्ट्री की और कब्जा शासकीय सर्वे क्रमांक में दिया गया। मामले में एमपीएलआरसी की धारा 248 के तहत प्रकरण दर्ज कर तहसीलदार न्यायालय द्वारा कार्यवाही की गई जिसकी एसडीएम न्यायालय में कब्जेदारों द्वारा अपील की गई जो निरस्त हुई।

गुरूदयाल कुकरेजा द्वारा उच्च न्यायालय में डब्ल्यूपी क्रं 31296 में शिकायत के बाद जांच हुई और सर्वे क्रमांक 1887 और 1889 सीलिंग के माध्यम से शासकीय पाई गई और इस पर बने मकान पर कार्रवाई के आदेश जारी हुए।

रजिस्ट्री कार्यालय और नगर निगम पर उठे सवाल

ग्राम कोटा लश्कर के सर्वे क्रमांक 1890/1 की 1076 स्क्वायर फीट जगह की रजिस्ट्री एक बार नहीं, बल्कि कई बार अलग-अलग लोगों को की गई है। जिससे कि रजिस्ट्रार कार्यालय में मौजूद इन रजिस्ट्री प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि सब रजिस्ट्रार ने कैसे एक ही रकबे पर इतनी रजिस्ट्री कर दी। इसके अलावा शासकीय भूमि पर बने इन मकानों की निगरानी और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अफसर भी लंबे समय तक अंजान बने रहे, जिससे यह अवैध कॉलोनी बस गई।

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