जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: 43 करोड़ के धान घोटाले की जांच रिपोर्ट 6 हफ्ते में पेश करे सरकार, 28 जिलों में हुआ था फर्जीवाड़ा

लोकमत सत्याग्रह/विशेष संवाददाता, जबलपुर
2 अक्टूबर, 2026

जबलपुर: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित ₹43.03 करोड़ के धान परिवहन घोटाले में आज जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकार को पूरे प्रदेश में हुई जांच की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए 6 सप्ताह का अंतिम समय दिया है।

चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट आदेश दिया कि सरकार द्वारा पेश की जाने वाली जांच रिपोर्ट की एक प्रति अनिवार्य रूप से याचिकाकर्ता के वकील को भी सौंपी जाए, ताकि वे अगली सुनवाई में सरकार के दावों की समीक्षा कर सकें।

28 जिलों में फैला है फर्जीवाड़े का जाल

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपाण्डे और रजत भार्गव द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) में आरोप लगाया गया है कि यह घोटाला सिर्फ एक या दो जिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के 28 जिलों में राइस मिलर्स, परिवहनकर्ताओं और विभागीय अधिकारियों की साठगांठ से अंजाम दिया गया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने कोर्ट के समक्ष अब तक की कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट पेश की है, लेकिन कोर्ट ने अब पूरे मामले का मुकम्मल ब्योरा मांगा है।

स्कूटर और ऑटो के नंबर पर ढोया गया सैकड़ों क्विंटल धान

याचिकाकर्ता के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि बायो-फ्यूल (एथेनॉल) बनाने के नाम पर गोदामों से जो धान उठाई गई थी, उसे एथेनॉल प्लांट भेजने के बजाय बिचौलियों ने खुले बाजार में बेच दिया।

इस घोटाले को छिपाने के लिए परिवहन के कागजात में भारी फर्जीवाड़ा किया गया। जांच में सामने आया कि:

  • नियमों के मुताबिक वाहनों में GPS ट्रैकिंग अनिवार्य थी, जिसे जानबूझकर बंद रखा गया।
  • जिन गाड़ियों के नंबरों पर सैकड़ों क्विंटल धान का परिवहन दिखाया गया, वे वास्तव में स्कूटर, ऑटो-रिक्शा और मारुति जेन जैसी छोटी कारों के निकले।
  • कागजों पर एक ही ट्रक को एक ही दिन में जबलपुर से उज्जैन जैसे लंबी दूरी के रूट पर 3 से 4 बार चक्कर लगाते दिखाया गया, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है।

स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग

इस मामले में जबलपुर और बालाघाट सहित कई जिलों में एफआईआर (FIR) दर्ज कर कुछ राइस मिलर्स को जेल भेजा जा चुका है। हालांकि, घोटाले के व्यापक स्वरूप को देखते हुए याचिकाकर्ता अब इस पूरे नेक्सस की जांच सीबीआई (CBI) या किसी अन्य स्वतंत्र उच्च स्तरीय एजेंसी से कराने की मांग कर रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी, जिसमें सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी होगी।

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