लोकमत सत्याग्रह /दीपू वर्मा /धौलपुर
तीन राष्ट्रीय राजमार्गों और दो राज्यों की सीमाओं से घिरे जिले में प्रवर्तन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका, विभाग के फैसले पर पुनर्विचार की मांग
धौलपुर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले धौलपुर में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले में पहले से ही परिवहन निरीक्षकों की कमी होने के दावों के बीच तीन अधिकारियों गौरव सक्सैना, मुकुल कुंद्रा और दीपक शर्मा को 15 दिनों के लिए जोधपुर भेजे जाने का आदेश चर्चा का विषय बन गया है। इस निर्णय से जिले में वाहनों की जांच, यातायात नियमों की पालना और राजस्व वसूली जैसी व्यवस्थाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
धौलपुर की भौगोलिक स्थिति परिवहन विभाग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमाओं से सटे इस जिले से प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं, जिन पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में ट्रक, बसें और अन्य व्यावसायिक वाहन आवागमन करते हैं। ऐसे में ओवरलोडिंग, कर चोरी और आवश्यक दस्तावेजों के बिना संचालित वाहनों की जांच के लिए पर्याप्त अधिकारियों की उपलब्धता जरूरी है।
निरीक्षकों की कमी के बीच तीन अधिकारियों को भेजने पर सवाल
जिले में पहले से स्टाफ की कमी की बात सामने आ रही है। ऐसे में तीन अधिकारियों को एक साथ 15 दिनों के लिए दूसरे जिले में भेजे जाने से स्थानीय परिवहन व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि इस अवधि में जांच के लिए पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो वाहनों की नियमित जांच और प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई प्रभावित हो सकती है।
सीमावर्ती जिले में जांच व्यवस्था कितनी प्रभावी रहेगी?
धौलपुर से होकर गुजरने वाले व्यावसायिक वाहनों की नियमित जांच सड़क सुरक्षा और सरकारी राजस्व, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में सवाल यह है कि तीन अधिकारियों की अनुपस्थिति के दौरान विभाग जिले में चेकिंग व्यवस्था किस तरह संचालित करेगा? क्या वैकल्पिक अधिकारियों की तैनाती की गई है और क्या सीमावर्ती मार्गों पर निगरानी का पर्याप्त इंतजाम रहेगा?
विभाग के फैसले के आधार पर पर स्पष्टीकरण की जरूरत
तीनों अधिकारियों को जोधपुर भेजने के आदेश के पीछे प्रशासनिक कारण क्या हैं और धौलपुर में इस अवधि के दौरान कार्य व्यवस्था किस प्रकार संचालित होगी, इसे लेकर विभागीय स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अधिकारियों को भेजने से पहले जिले में उपलब्ध स्टाफ और प्रवर्तन कार्यों की जरूरत का आकलन किया गया या नहीं।
पुनर्विचार और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
जिले में परिवहन व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मांग की जा रही है कि विभाग स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आदेश की समीक्षा करे। यदि अधिकारियों को जोधपुर भेजना आवश्यक है, तो धौलपुर में पर्याप्त वैकल्पिक स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वाहनों की जांच, सड़क सुरक्षा और राजस्व वसूली का काम प्रभावित न हो।
अब निगाहें परिवहन विभाग के रुख पर हैं। विभाग की ओर से आदेश के कारणों और धौलपुर में वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि इस निर्णय का जिले की परिवहन व्यवस्था पर कितना प्रभाव पड़ेगा।

