देवास में MP कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी शराब का क्वार्टर देकर अधिकारियों से बोले- आप पीकर देख लो

लोकमत सत्याग्रह/चंदाना गांव में हुई मौतों के मामले में कांग्रेस आक्रामक हुई और इसका असर यह हुआ कि देवास और सागर में सरकार को कार्रवाई करनी पड़ी। दोनों ही जिलों के कलेक्टर-एसपी को हटाया गया। देवास की जिला आबकारी अधिकारी को भी निलंबित किया गया।

देवास : चंदाना गांव में हुई मौतों के मामले में कांग्रेस आक्रामक हुई और इसका असर यह हुआ कि देवास और सागर में सरकार को कार्रवाई करनी पड़ी। दोनों ही जिलों के कलेक्टर-एसपी को हटाया गया। देवास की जिला आबकारी अधिकारी को भी निलंबित किया गया। प्रशासनिक लापरवाही सामने आई और अवैध शराब बिक्री की पोल खुली। आरोपों की जद में सरकार भी आई और कांग्रेस ने आरोप लगाए कि पूरा प्रदेश शराब माफियाओं की जकड़ में है।

मंगलवार को कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा देवास पहुंचे। यहां कांग्रेसजन के साथ भोपाल चौराहे से रैली के रूप में नारेबाजी करते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यहां भोपाल रोड पर रास्ताजाम किया। कांग्रेसजन अपने हाथों में तख्तियां लहराते हुए चल रहे थे जिनमें जहरीली शराब के आरोप थे। कांग्रेसजन के साथ ही चंदाना के वे लोग भी थे जिनके स्वजन की शराब पीने के बाद मौत हुई है। यहां करीब डेढ़ घंटे तक हंगामा चला और कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी स्थानीय प्रशासन पर जमकर बरसे।

जीतू पटवारी देशी शराब के कुछ क्वार्टर भी साथ लेकर आए थे

प्रदर्शन के दौरान जीतू पटवारी देशी शराब के कुछ क्वार्टर भी साथ लेकर आए थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ये मैं यहीं से खरीदकर लाया हूं। शराब के क्वार्टर पर रैफर व टेग नहीं हैं, आप कह रहे हैं जहरीली शराब की जांच कराएंगे, अरे शराब पीने वाला ही मरा है। उन्होंने एडीएम को एक क्वार्टर देकर कहा कि इसे पीकर देख लो, इससे अच्छी जांच क्या होगी। लोग शराब से मर रहे हैं, लेकिन प्रशासन, पानी के सैंपल ले रहा हैं। आरोप यह भी लगाया कि अलग-अलग दुकानों से हमने देशी शराब के क्वार्टर मंगवाए। इनमें से अधिकांश पर लेबल ही नहीं है। ऐसा क्यों किया गया।

कांग्रेस ने मांग की कि इस गंभीर मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ हत्या की धारा के तहत एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।शराब माफियाओं का बढ़ रहा दबाव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि मप्र में शराब माफियाओं का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। अवैध शराब के कारण लोगों की जान जा रही है, लेकिन सरकार और प्रशासन वास्तविक दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने से बच रहे हैं।

जहरीली शराब से अपनों को खोने वाले परिवार न्याय की गुहार लगा रहे हैं

सागर और मुरैना में अवैध शराब से हुई मौतों की घटनाएं भी प्रदेश में शराब माफियाओं के बढ़ते प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। पटवारी ने कहा कि जहरीली शराब से अपनों को खोने वाले परिवार न्याय की गुहार लगा रहे हैं। स्वजन द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें जांच का आश्वासन दिया जा रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

जब लोगों की जान चली गई है, तब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष जांच करे और दोषियों को कानून के कटघरे में खड़ा करे। कांग्रेस की मांग है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर हत्या सहित उपयुक्त धाराओं में प्रकरण दर्ज कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

शराब माफियाओं के प्रभाव के चलते कार्रवाई में देरी हो रही है

आरोप लगाया कि शराब माफियाओं के प्रभाव के चलते कार्रवाई में देरी हो रही है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर जहरीली शराब के कारोबार पर प्रभावी अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है और पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है। जरूरत पड़ने पर उज्जैन, इंदौर और भोपाल सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक पदयात्रा और रैलियां निकालकर इस मुद्दे को जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनीष चौधरी से कहा कि पीड़ित परिवारों के साथ संबंधित थानों में पहुंचकर एफआईआर दर्ज करवाएं। इसके बाद शाम को कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी व अन्य नेता सिविल लाइन थाने पहुंचे और एफआइआर को लेकर ज्ञापन दिया। इस दौरान पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, जिला कांग्रेस प्रभारी सुरेंद्र सिंह शेरा, विनय बाकलीवाल, जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनीष चौधरी, शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रयास गौतम सहित कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कर रहे

प्रदर्शन के दौरान ही पटवारी ने कलेक्टर को बुलवाया, लेकिन वे नहीं आए। इसके बाद एडीएम एसआर सोलंकी, एसडीएम अभिषेक शर्मा और सीएसपी सुमित अग्रवाल पहुंचे। पटवारी ने पीड़ित परिवारों के सामने ही उनसे बात की और कहा कि जब ये लोग कह रहे हैं कि शराब पीने से मौत हुई है तो एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की जा रही। हद तो यह है कि मौत शराब पीने से हुई है और प्रशासन पानी की जांच करवा रहा।

अवैध शराब के मामले में, डायरी पर बिक रही शराब के मामले में आरोपितों को पकड़ लिया तो पीड़ित लोगों की तरफ से एफआईआर क्यों नहीं लिखी जा रही। अधिकारी बगले झांकते रहे और यही कह पाए कि जांच करवा रहे हैं। पटवारी ने आक्रामक लहजे में कहा कि हम जानते हैं आप पर सरकार का, शराब माफियाओं का दबाव है।

आबकारी विभाग के अधिकारी निलंबित कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद मामले में कलेक्टर ऋतुराज सिंह व एसपी पुनीत गेहलोद के तबादले के साथ ही आबकारी विभाग के अधिकारियों पर भी गाज गिरी है। जिला आबकारी बसंती भूरिया सहित सहायक जिला आबकारी अधिकारी निलेश कुमार पवार व आबकारी उपनिरीक्षक राजश्री खन्ना को निलंबित किया गया है। पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा ने इंटरनेट मीडिया में पोस्ट कर लिखा है कि कलेक्टर-एसपी का तबादला करने से काम नहीं चलेगा। पीड़ित परिवारों को मुआवजा व सरकारी नौकरी दी जाए। कलेक्टर-एसपी पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए।

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