रैगिंग के मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट ने सुनाई ऐसी दिलचस्प सजा, सुनकर हुए सभी हैरान

लोकमतसत्याग्रह/ग्वालियर हाईकोर्ट ने रैगिंग मामले की सुनवाई में एक अहम टिप्पणी की है. गुरुवार को हाईकोर्ट में छात्र सचिन भदौरिया की याचिका पर सुनवाई हुई. जिसमें हाई कोर्ट ने सचिन के खिलाफ दर्ज रैगिंग की FIR निरस्त करने का आदेश दिया है. सचिन को विश्विद्यालय में 7 दिन तक कम्युनिटी सर्विस करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी से कहा कि “रैगिंग करने वाले छात्रों के माता-पिता को विश्वविद्यालय में बुलाएं, इससे छात्रों का ईगो पिघलेगा”.

इस मामले में पीड़ित छात्रों ने विश्वविद्यालय थाने में शिकायत की थी जिसमें जांच के बाद सचिन के खिलाफ रैगिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था. इस मामले में आरोपी छात्र सचिन और फरियादी अनुज राजावत के बीच सुलह समझौता हो गया. इस आधार पर सचिन ने हाई कोर्ट से अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने के लिए गुहार लगाई थी.

हाईकोर्ट ने दिया फैसला बनेगा सबके लिए नजीर

हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई के बाद रैगिंग की FIर निरस्त कर दी , वहीं आरोपी छात्र सचिन को लाइब्रेरी में 7 दिन कम्युनिटी सर्विस के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय से कहा कि- “रैगिंग करने वाले छात्रों के माता-पिता को विश्वविद्यालय में बुलाएं, इससे छात्रों का ईगो पिघलेगा”. वहीं ये भी बताएं कि आपने रैगिंग रोकने के लिए क्या इंतजाम किए हैं. इसकी रिपोर्ट कोर्ट ने तलब की है. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद रैगिंग के मामलों में कमी आ सकती है. यह फैसला एक नजीर बनेगा, जिससे रैगिंग को लेकर छात्रों में एक तरह से अवेयरनेस आ सकती है.

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