लोकमत सत्याग्रह/शक्ति, भक्ति और समर्पण की जीवंत गाथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमान जी के जन्म प्रसंग ने बांधा समां
रीबारी, प्रयागराज। शारदीय नवरात्रि की पावन बेला, चारों ओर गूंजते प्रभु श्रीराम के जयकारे और भक्ति में लीन श्रद्धालुओं का सैलाब। बड़ी जूही गांव में आयोजित नवदिवसीय भव्य श्रीराम कथा का चौथा दिन ऐसा भक्तिमय रहा कि मानो पूरा कथा पंडाल रामभक्ति की अविरल धारा में डूब गया हो।
जैसे ही अंतरराष्ट्रीय कथा वाचिका पूज्या शास्त्री शाकाम्भरी द्विवेदी ‘मानस मंजरी’ ने भगवान श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया, श्रद्धालुओं के हृदय श्रद्धा और भक्ति से भर उठे। पंडाल में गूंजते ‘जय श्रीराम’ और ‘जय बजरंगबली’ के जयकारों ने वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। हनुमान जी के प्राकट्य प्रसंग ने जगाई भक्ति की अलख, सेवा-समर्पण और मर्यादा का सुनाया दिव्य संदेश कथा व्यास ने भगवान श्री हनुमान जी के जन्म प्रसंग का ऐसा भावपूर्ण वर्णन किया कि श्रद्धालु मानो स्वयं उस दिव्य क्षण के साक्षी बन गए। प्रभु श्रीराम के प्रति हनुमान जी की अटूट निष्ठा, अद्भुत पराक्रम, अतुलनीय सेवा भावना और निष्काम समर्पण का वर्णन सुनकर भक्त भावविभोर हो उठे। कथावाचिका ने संदेश दिया कि हनुमान जी का जीवन केवल शक्ति और साहस का प्रतीक नहीं, बल्कि विनम्रता, सेवाभाव, धर्मनिष्ठा और प्रभु के चरणों में पूर्ण समर्पण की अनुपम मिसाल भी है। उनकी भक्ति हमें सिखाती है कि सच्ची शक्ति वही है, जो धर्म की रक्षा, पीड़ितों की सेवा और प्रभु के कार्यों में समर्पित हो। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जयकारे लगाते रहे और पूरा पंडाल राममय हो उठा। बड़ी जूही में आयोजित यह नवदिवसीय श्रीराम कथा ग्यारह अक्टूबर से उन्नीस अक्टूबर दो हजार छब्बीस तक प्रतिदिन रात्रि सात बजे से दस बजे तक चल रही है। कार्यक्रम के आयोजक महेश जायसवाल तथा समस्त कार्यकर्ता और भक्तजन आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं। इस अवसर पर छैल बिहारी दास मानस केसरी, शिवम द्विवेदी, जितेंद्र जायसवाल, विशाल जायसवाल, दीपक जायसवाल, ऋषभ जायसवाल, आयुष जायसवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के चौथे दिन हनुमान जन्मोत्सव के प्रसंग ने भक्तों के मन में नई ऊर्जा, अटूट आस्था और प्रभु श्रीराम के प्रति समर्पण का भाव जागृत किया। पूरा आयोजन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अनुपम संगम बन गया।

