लोकमतसत्याग्रह/सावन का आखिरी सोमवार आज है। सुबह से मंदिरों पर भीड़ का आलम है। इस बार सावन में चार नहीं बल्कि आठ सोमवार पड़े हैं। यही कारण है कि मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन और पुलिस ने काफी इंतजाम किए हैं। सुबह 4 बजे से शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में भीड़ लगी है। अचलेश्वर पर दूर-दूर तक भक्तों की लाइन है। श्रद्धालु पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक कर अराधना कर रहे हैं।
दूध–दही पंचामृत से होता है अभिषेक
भगवान शिव को सावन का सोमवार विशेष रूप से प्रिय है। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि सावन में भगवान शिव का गंगाजल व पंचामृत से अभिषेक करने से शांति मिलती है। बेलपत्र, भांग, धतूरे, आक के फूल से पूजन करने का प्रावधान है। इसके अलावा पांच तरह के जो अमृत बताए गए हैं उनमें दूध, दही, शहद, घी व शक्कर मिलाकर बनाए गए पंचामृत से भगवान की पूजा विशेष लाभदायी होती है। यही कारण है कि अचलेश्वर महादेव मंदिर, कोटेश्वर, गुप्तेश्वर पर सुबह 4 बजे से ही पंचामृत लेकर भक्त लाइन में लगे है।
ग्वालियर के इन शिवालयों पर रही भीड़
ग्वालियर में प्रसिद्ध शिवालयों की बात करें तो अचलेश्वर महादेव मंदिर, कोटेश्वर महादेव मंदिर, गुप्तेश्वर महादेव मंदिर, चकलेश्वर और भूतेश्वर शिव मंदिर हैं। इसके अलावा फूलबाग स्थित मार्कण्डेश्वर और सीपी कॉलोनी स्थित कलिकेश्वर नाग मंदिर पर भी विशेष आयोजन सावन माह के आखिरी सोमवार को हो रहे हैं। इसलिए यहं मंदिर प्रबंधन ने पुरुष और महिलाओं की लाइन अलग-अलग कर व्यवस्था बनाई है।
धूमेश्वर धाम पर लगा मेला
ग्वालियर के भितरवार ब्लॉक में सिंध और पार्वती नदी के संगम पर प्राचीन धूमेश्वर मंदिर है। यह कब बना और किसने बनवाया यह कोई नहीं बता पाता, लेकिन सावन के हर सोमवार को यहां मेला लगता है। सावन माह के आखिरी सोमवार को यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं और मंदिर के किनारे बसी नदी में स्नान कर शिवलिंग की पूजा अर्चना कर रहे हैं। यह मंदिर ग्वालियर शहर से करीब 75 किलोमीटर दूर है।
मंदिरों के आसपास कड़ी सुरक्षा
सोमवार को शिवालयों के आसपास कड़ी सुरक्षा रहती है। एसएसपी ग्वालियर राजेश चंदेल ने मंदिरों के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लगाने के निर्देश दिए थे मंदिरों के आसपास पुलिस के चेकिंग पॉइंट बनाए गए हैं। जिससे महिलाओं के साथ कोई भी घटना न हो सके। मंदिरों पर भीड़ लगने पर ट्रैफिक को नियंत्रण करने के लिए अलग से पुलिस बल तैनात किया गया है।
मंगलवार को मंगला गौरी पूजन है
29 अगस्त तेरस मंगलवार के दिन मंगला गौरी का व्रत पूजन किया जाएगा। यह सावन मास का आखिरी मंगला गौरी व्रत होने से इसका महत्व अधिक माना गया है। इस दिन मंगला गौरी की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पंचोपचार पूजन करें तथा उनका रोली, चंदन, हल्दी, सिंदूर, मेहंदी, काजल लगाकर श्रृंगार करें। उन्हें 16-16 प्रकार फूल, पत्ते, फल, मिठाई, जीरा, पान सुपारी, धनिया, लॉग-इलायची, चूडियां अर्पित करने के उपरांत कथा सुनें।
बुधवार को रक्षाबंधन मनाया जाएगा
30 अगस्त, बुधवार को रक्षाबंधन, श्रावणी उपाकर्म एवं कोकिला व्रत की पूर्णता होने से यह दिन विशेष महत्वपूर्ण होगा। इस दिन मित्र योग की निष्पत्ति हो रही है। रक्षाबंधन के दिन सुबह 10:59 बजे पूर्णिमा तिथि के प्रारंभ होने के साथ भद्रा प्रारंभ हो जाएंगी जो रात 9:02 बजे समाप्त होगी। इसलिए रक्षाबंधन भद्रा के बाद शुरू होगा। 31 अगस्त, पूर्णिमा पुण्यकाल में सावन का समापन होगा।


