लोकमतसत्याग्रह/एम के सिटी के पांडाल में “धर्मसंकट” नामक। नाटक का मंचन हुआ। रामायण की कथा केवल रावण वध कि नहीं अपितु सही मूल्यों की स्थापना की है। सही मूल्य अर्थात धर्म और यदि दोनों बातें ही सही लगें तो किसी एक का चुनाव कैसे करें, यही धर्मसंकट कहलाता है। नाटक में चार दृश्य प्रस्तुत किये गए। पहला दशरथ का धर्मसंकट, दूसरा लक्ष्मण का धर्मसंकट, तीसरा सुषेण वैद्य का धर्मसंकट और चौथा राम का धर्मसंकट। पूरे नाटक की अवधि एक घण्टा रही। नाटक में सबसे छोटे अभिनव तिवारी 8 वर्ष से लेकर सबसे बड़ी प्रेम जौहरी 80 वर्ष की कलाकार के साथ सभी पात्रों ने उत्तम अभिनय कर दर्शकों को बांधे रखा। कुर्सियां कम पड़ने पर लोग खड़े-खड़े ही नाटक का आनंद लेते रहे। अपनी संवाद अदायगी और अभिनय से कैकयी बनी तान्या ने सबसे अधिक प्रशंसा पाई।
पहले दृश्य में राजा दशरथ और कैकई का संवाद था, जिसमें कैकई ने अपने दो वरदान मांगे थे। पहला भरत को अयोध्या का राजा बनना और दूसरा राम को 14 वर्ष का वनवास। तब राजा दशरथ धर्मसंकट में पड़ जाते हैं।
दूसरा दृश्य था माता सबरी का आश्रम, जिसमें माता शबरी अपने झूठे बेर राम और लक्ष्मण को खिलाती हैं। राम तो शबरी के झूठे बेर स्वीकार कर लेते हैं, पर लक्ष्मण जी धर्मसंकट में पड़ जाते हैं। और शबरी के झूठे बेर फेंक देते हैं।
तीसरा दृश्य था जब लक्ष्मण को शक्ति लग जाती है तब हनुमान जी सुषेण वैद्य को लंका से उठा कर ले आते हैं, तब सुषेण वैद्य धर्मसंकट में पड़ जाते हैं कि शत्रु पक्ष का उपचार करूं या अपना राजधर्म निभाऊँ।
और अंतिम दृश्य था राम की शक्ति पूजा जब राम को विजय प्राप्त नहीं हो रही थी तब उन्होंने नौ दिन ध्यान व तपस्या करके शक्तियां अर्जित की और रावण का वध किया और अंत में रावण दहन का कार्यक्रम संपन्न हुआ।
निर्देशक व सूत्रधार – चंद्र शेखर मालवी
मंच पर कलाकार थे।
दशरथ – प्रशांत द्विवेदी,
कैकेयी – तान्या टुटेजा,
शबरी – प्रेम जौहरी,
राम – प्रदीप शर्मा,
लक्ष्मण – रंजीत कुमार,
शक्ति – अंशु पाटिल,
सुषेण वैद्य – डॉ राजीव गुप्ता,
विभीषण – अजय गुप्ता,
हनुमान – अमित श्रीवास्तव,
जामवंत – अवि तिवारी,
सिद्धिदात्री – आशि गुप्ता,
देवियां- राध्या, यशवी, प्रियांशी, कोविदा
और मंच से परे थे
अक्षर तिवारी,
आदित्य भदौरिया,
विभाकर तिवारी,
सविता चौरसिया,
सारिका श्रीवास्तव,
सुप्रिया गुप्ता,
प्रतीक्षा कुमारी,
संगीता शर्मा,
ऋतु शर्मा


