लोकमतसत्याग्रह/अपनी मां के साथ रतलाम जाने के लिए झांसी बांद्रा एक्सप्रेस के एसी कोच में सवार होते ही बेहोश होने के बाद 108 एंबुलेंस की लापरवाही से युवक अमन कपूर की मौत के मामले में भोपाल तक बवाल मच गया है। 108 एंबुलेंस सेवा की ओर से कोई फोन नहीं आने की बात कही जा रही है, जबकि ड्यूटी पर मौजूद डिप्टी एसएस एएस सोनकर ने अपने मोबाइल से 36 मिनट के अंदर 108 एंबुलेंस को छह काल किए थे। हर बार उन्हें एक ही जवाब मिला कि एंबुलेंस अभी व्यस्त है। खाली होते ही आ जाएगी, लेकिन एंबुलेंस देर रात तक स्टेशन नहीं पहुंची।
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने एक जांच कमेटी का गठन कर दिया है।भोपाल के स्वास्थ्य अधिकारियों ने सीएमएचओ को निर्देश दिए हैं कि मामले की पूरी रिपोर्ट भेजी जाए। बुधवार को डीएचओ डा. हेमशंकर शर्मा व नोडल अधिकारी 108 एंबुलेंस इंद्रपाल निवारिया ड्यूटी पर मौजूद डिप्टी एसएस के बयान लेंगे। उधर रेलवे के अधिकारियों ने भी डिप्टी एसएस के मोबाइल से किए गए काल की डिटेल निकलवा ली है, ताकि उसे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जांच के लिए उपलब्ध करा दिया जाए।
उल्लेखनीय है कि गत सोमवार की शाम मामा का बाजार निवासी 35 वर्षीय अमन कपूर अपनी मां बीनू कपूर के साथ ग्वालियर से रतलाम के लिए यात्रा करने स्टेशन पहुंचे थे। झांसी-बांद्रा एक्सप्रेस के थर्ड एसी कोच बी-8 में सीट नंबर पांच और आठ पर उनका आरक्षण भी था। ट्रेन में सवार होते ही अमन कपूर अचानक बेहोश हो गए। रेलवे के स्टाफ ने उन्हें ट्रेन से उतारकर एंबुलेंस को फोन किए। अमन के स्वजन मामा का बाजार से स्टेशन तक पहुंच गए, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। ऐसे में निजी टैक्सी में बैठाकर अमन को ट्रामा सेंटर ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
पिछले दो साल से रेलवे और स्वास्थ्य विभाग में एंबुलेंस को लेकर सामंजस्य नहीं बन पा रहा है। रेलवे स्टेशन पाइंट का हवाला देकर एंबुलेंस आवंटित की गई है, लेकिन ये स्टेशन पर खड़ी नहीं होती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रेलवे द्वारा एंबुलेंस खड़ी करने के लिए जगह देने के साथ ही कर्मचारियों के लिए अलग से जगह उपलब्ध कराई जाए, जहां वे आराम भी कर सकें। उधर रेलवे का तर्क है कि गाड़ी खड़ी करने के लिए सर्कुलेटिंग एरिया में जगह दी जा रही है और रात 10 बजे तक आरक्षण कार्यालय में कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था भी की जाए, लेकिन आराम करने के लिए पर्याप्त जगह की मांग पर स्वास्थ्य विभाग अड़ा रहता है।
इस मामले में स्टेशन निदेशक एलआर सोलंकी का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को एंबुलेंस की दिक्कत को लेकर कई बार पत्र भी लिखे गए हैं, लेकिन एंबुलेंस स्टेशन पर खड़ी नहीं होती है।
टैक्सी में चल रही थीं सांसें
अमन कपूर के पिता राज कपूर ने चर्चा में बताया कि अमन के बेहोश होने पर उनकी पत्नी बीनू ने तत्काल उन्हें फोन किया। वे लगभग 25 मिनट में स्टेशन पहुंच गए। स्टेशन पहुंचने पर देखा कि अमन को स्ट्रेचर पर लेटाया गया था और एंबुलेंस का इंतजार हो रहा था। आसपास जीआरपी और आरपीएफ के जवान खड़े हुए थे। वे जब स्टेशन पहुंचे, तो एक निजी टैक्सी वाले ने अमन को अस्पताल पहुंचाने के लिए हामी भरी। अमन को जब टैक्सी में लेटाया गया, तब तक सांसें चल रही थीं। इसके चलते स्वजनों ने सीपीआर देने की कोशिश की। अमन को मुंह से भी सांसें दीं। जब ट्रामा सेंटर पहुंचे, तब तक अमन की जान जा चुकी थी। ईसीजी में भी दिल में कोई हरकत नहीं आई। उन्होंने कहा कि यदि समय से एंबुलेंस पहुंचती, तो उनके बेटे की जान बच सकती थी।



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