लोकमतसत्याग्रह/रायरू से शुरू होकर झांसी और शिवपुरी जाने वाले दो राष्ट्रीय राजमार्ग अब हादसों के हाईवे बन चुके हैं। इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर छोटी-छोटी खामियों के कारण लोग दर्दनाक हादसों के शिकार हो रहे हैं। ताजा मामला घाटीगांव क्षेत्र का है, जहां हाईवे किनारे टूटी पड़ी रेलिंग कार में सवार महिला के शरीर के आर-पार हो गई।
महिला की मौके पर ही मौत हो गई। इससे पहले भी ऐसे तीन हादसे हो चुके हैं। ये टूटी रेलिंग लोगों की जान ले रही हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के अधिकारियों के अनुसार इस पूरे इलाके में 100 किमी रेलिंग चोरी हो चुकी हैं। इन्हें बार-बार बदलवाया जा रहा है, लेकिन लोग सड़क पर लेन बदलने के लिए इन्हें तोड़ रहे हैं।
चोरी के पीछे ये है कारण
वहीं असामाजिक तत्व इन्हें बेचने के इरादे से चोरी कर ले जा रहे हैं। नौबत यहां तक आ चुकी है कि हाईवे पर इन छोटे-छोटे कार्यों के लिए नियुक्त की गई एजेंसी का अनुबंध से अधिक खर्च हो चुका है। इस क्षेत्र में हो रही रेलिंग चोरी की घटनाओं को देखते हुए विशेष तौर पर एक बड़ी एजेंसी को नियुक्त करने के लिए दिल्ली स्थित मुख्यालय से अनुमति मांगी गई है।
ज्यादा समस्या शिवपुरी की ओर जाने वाले नेशनल हाईवे क्रमांक 46 पर है। इसका कारण है कि इस राजमार्ग पर शहर के बाहरी इलाकों के बावजूद आबादी क्षेत्र ज्यादा है। राजमार्ग के बगल से गांव बसे हुए हैं। ऐसे में स्थानीय ग्रामीण अपनी सुविधा के अनुसार सड़क पार करने या दोपहिया व चार पहिया वाहनों को दूसरी लेन में ले जाने के लिए रैलिंग को तोड़ देते हैं।
टूटी हुई रेलिंग को भी वे अपने साथ ही ले जाते हैं
एनएचएआइ की अधिकृत रिपोर्ट के अनुसार 115 किमी के हाईवे पर अलग-अलग हिस्सों में औसतन 15 किमी लंबी रेलिंग चोरी होती रहती हैं। इसकी रिपोर्ट दिल्ली स्थित मुख्यालय भी भेजी गई है।
वर्ष 2021 से हो रहीं घटनाएं, नईदुनिया ने तकनीक से जाने हालात- एनएचएआइ की अधिकृत रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 से ग्वालियर से शिवपुरी के बीच हाईवे पर रेलिंग चोरी की घटनाएं हो रही हैं। लोग 200-200 मीटर लंबाई रेलिंग चोरी कर ले जा रहे हैं।
इस बात की पुष्टि तकनीक के जरिये स्थितियों को समझने की कोशिश की। गूगल मैप्स की पाथ सर्विस का इस्तेमाल कर हाईवे के पुराने हालातों पर नजर डाली, तो सामने आया कि दिसंबर 2022 में भी कई स्थानों पर मीटरों लंबी रेलिंग गायब है। यहां सिर्फ रेलिंग लगाने के लिए गाड़े गए छोटे खंबे ही खड़े नजर आ रहे हैं।लोकमतसत्याग्रह/रायरू से शुरू होकर झांसी और शिवपुरी जाने वाले दो राष्ट्रीय राजमार्ग अब हादसों के हाईवे बन चुके हैं। इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर छोटी-छोटी खामियों के कारण लोग दर्दनाक हादसों के शिकार हो रहे हैं। ताजा मामला घाटीगांव क्षेत्र का है, जहां हाईवे किनारे टूटी पड़ी रेलिंग कार में सवार महिला के शरीर के आर-पार हो गई।
महिला की मौके पर ही मौत हो गई। इससे पहले भी ऐसे तीन हादसे हो चुके हैं। ये टूटी रेलिंग लोगों की जान ले रही हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के अधिकारियों के अनुसार इस पूरे इलाके में 100 किमी रेलिंग चोरी हो चुकी हैं। इन्हें बार-बार बदलवाया जा रहा है, लेकिन लोग सड़क पर लेन बदलने के लिए इन्हें तोड़ रहे हैं।
चोरी के पीछे ये है कारण
वहीं असामाजिक तत्व इन्हें बेचने के इरादे से चोरी कर ले जा रहे हैं। नौबत यहां तक आ चुकी है कि हाईवे पर इन छोटे-छोटे कार्यों के लिए नियुक्त की गई एजेंसी का अनुबंध से अधिक खर्च हो चुका है। इस क्षेत्र में हो रही रेलिंग चोरी की घटनाओं को देखते हुए विशेष तौर पर एक बड़ी एजेंसी को नियुक्त करने के लिए दिल्ली स्थित मुख्यालय से अनुमति मांगी गई है।
ज्यादा समस्या शिवपुरी की ओर जाने वाले नेशनल हाईवे क्रमांक 46 पर है। इसका कारण है कि इस राजमार्ग पर शहर के बाहरी इलाकों के बावजूद आबादी क्षेत्र ज्यादा है। राजमार्ग के बगल से गांव बसे हुए हैं। ऐसे में स्थानीय ग्रामीण अपनी सुविधा के अनुसार सड़क पार करने या दोपहिया व चार पहिया वाहनों को दूसरी लेन में ले जाने के लिए रैलिंग को तोड़ देते हैं।
टूटी हुई रेलिंग को भी वे अपने साथ ही ले जाते हैं
एनएचएआइ की अधिकृत रिपोर्ट के अनुसार 115 किमी के हाईवे पर अलग-अलग हिस्सों में औसतन 15 किमी लंबी रेलिंग चोरी होती रहती हैं। इसकी रिपोर्ट दिल्ली स्थित मुख्यालय भी भेजी गई है।
वर्ष 2021 से हो रहीं घटनाएं, नईदुनिया ने तकनीक से जाने हालात- एनएचएआइ की अधिकृत रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 से ग्वालियर से शिवपुरी के बीच हाईवे पर रेलिंग चोरी की घटनाएं हो रही हैं। लोग 200-200 मीटर लंबाई रेलिंग चोरी कर ले जा रहे हैं।
इस बात की पुष्टि तकनीक के जरिये स्थितियों को समझने की कोशिश की। गूगल मैप्स की पाथ सर्विस का इस्तेमाल कर हाईवे के पुराने हालातों पर नजर डाली, तो सामने आया कि दिसंबर 2022 में भी कई स्थानों पर मीटरों लंबी रेलिंग गायब है। यहां सिर्फ रेलिंग लगाने के लिए गाड़े गए छोटे खंबे ही खड़े नजर आ रहे हैं।


