ग्वालियर CA से 21 करोड़ की ठगी का मामला: एक और आरोपी छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार, इसी के खोले खाते में पहुंचे थे 25 लाख रुपये

क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर शहर के चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से 21.05 करोड़ रुपये की साइबर ठगी में राज्य साइबर पुलिस ने एक और आरोपित को पकड़ा है।

ग्वालियर। क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर शहर के चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से 21.05 करोड़ रुपये की साइबर ठगी में राज्य साइबर पुलिस ने एक और आरोपित को पकड़ा है। पुलिस ने उसे छत्तीसगढ़ के कबीरधाम से गिरफ्तार किया है।

आरोपित का नाम मिथलेश जायसवाल (33 वर्ष) है। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम में मुंगेली का रहने वाला है। आरोपित ने फर्जी कंपनी मां एग्रो इंडस्ट्रीज प्रालि के नाम से बैंक में करंट खाता खुलवा रखा था। इसमें साइबर ठगी की रकम की हेराफेरी करता था।

चार्टर्ड अकाउंटेंट से ठगे गए 21.05 करोड़ रुपये में से 25 लाख रुपये पहली लेयर में इसी बैंक खाते में पहुंचे थे। इसी आधार पर राज्य साइबर पुलिस की टीम ने उसे चिह्नित किया और उसे शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। उसे कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया है।

निरीक्षक मुकेश नारोलिया, एसआई हिमानी पाठक, आरक्षक पुष्पेंद्र यादव व इनकी टीम चार दिन से छत्तीसगढ़ में डेरा जमाए हुए थी, तब आरोपित को पकड़ने में सफलता मिली।

मोबाइल में मिली कंबोडिया के नंबर पर चैटिंग

आरोपित के मोबाइल की शुरुआती जांच में 855 कंट्री कोड वाले नंबर से व्हाट्सएप चैट मिली है, जो कंबोडिया का कोड है। जांच में सामने आया है कि यह गैंग ऑटो फारवर्ड एप के जरिए बैंक खातों के एसएमएस-ओटीपी का एक्सेस आरोपित ने ले रखा था। वह और भी म्यूल खातों का नेटवर्क चलाता है।

पुलिस इस मामले में लगातार कार्रवाई कर रही है। इसको लेकर पुलिस जगह-जगह दबिश दे रही है। पुलिस साइबर ठगी की रकम का रूट निकाल रही है।

इसी खाते में आया तीन राज्यों से ठगी का पैसा

आरोपित का बैंक खाता केरल (एरनाकुलम), मध्य प्रदेश (ग्वालियर) और तमिलनाडु (थूथुकुडी) से साइबर फ्राड के मामलों में फ्रीज है। आरोपित और उसके भाई को पूर्व में चेन्नई पुलिस भी दो मामलों में गिरफ्तार कर चुकी है।

फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफार्म ट्रेड-सी बाउस से ठगी

फरियादी अशोक विजयवर्गीय ने 21.05 करोड़ रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। ठगों ने नाम से ट्रेड-सी बाउस एक फेक वेब पेज बनाया था।

इस पर निवेश की गई रकम का बढ़ता-घटता ग्राफ दिखाकर निवेशकों का विश्वास जीता जाता था। फर्जी वेबसाइट को फेक आइपी के जरिए आपरेट किया जा रहा था।

अशोक के पास सबसे पहले दिव्या सिंह नाम की महिला का काल आया था। उसने दोस्ती की, वह जिस नंबर से बात करती थी, उसमें कंट्री कोड कंबोडिया का निकला।

उसी ने ट्रेड सी बाउस के बारे में बताया था। सात माह में 176 बार में 21.05 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।

साइबर पुलिस की एडवाइजरी…

टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर किसी अज्ञात प्रोफाइल, ग्रुप या लिंक पर क्लिक न करें।

क्रिप्टोकरेंसी, जॉब ऑफर, पैकिंग वर्क या ट्रेडिंग में अत्यधिक लाभ के लालच में पैसे न भेजें।

इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया पर दिखने वाले बिजनेस व ट्रेडिंग के विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।

किसी के कहने पर एनीडेस्क, क्विक सपोर्ट, अल्ट्रा व्यूअर या टीम व्यूअर जैसे रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड न करें।

Leave a Reply