लोकमत सत्याग्रह के लिए कटनी से हरिशंकर पराशर की रिपोर्ट
गरीबों की बस्तियों पर बुलडोजर से पहले मालिकाना हक के दस्तावेज पेश करने की मांग
मध्य प्रदेश समेत देश के कई इलाकों में गरीब परिवारों की झोपड़ियां फिर उजाड़ी जा रही हैं। प्रशासन का दावा है कि यह अतिक्रमण है और जमीन सरकारी है। लेकिन बुनियादी सवाल अनुत्तरित है—सरकारी होने का ठोस सबूत कहां है?
आजादी के बाद सैकड़ों रियासतें भारतीय संघ में शामिल हुईं। सरदार वल्लभभाई पटेल और वी.पी. मेनन के प्रयासों से शासन और संप्रभुता भारत को सौंपी गई। लेकिन निजी महल, व्यक्तिगत संपत्ति और सार्वजनिक संसाधन कभी एक श्रेणी में नहीं रहे। विलय का अर्थ यह नहीं था कि हर जमीन अपने-आप सरकार की हो गई।
राजशाही समाप्त हुई, प्रिवी पर्स भी खत्म कर दिए गए, लेकिन संपत्ति के वैध अधिकार इतिहास से मिट नहीं गए। आज जब बुलडोजर चलता है तो सिर्फ यह कह देना पर्याप्त नहीं कि “अब लोकतंत्र है, इसलिए जमीन हमारी”। लोकतंत्र का अर्थ है कि सरकार भी कानून के अधीन रहे।
गरीब परिवारों के पास अक्सर बड़े वकील या राजनीतिक पहुंच नहीं होती। कई परिवार पीढ़ियों से एक ही जगह रह रहे हैं। उनके पास बिजली-पानी के बिल, पुराने पट्टे या कर रसीदें हो सकती हैं। गरीब होना अपराध नहीं है। लंबे समय से रहना भी अपने-आप मालिकाना हक नहीं बनाता। दोनों बातें साफ रखनी होंगी।
सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए—
- जमीन सरकारी है तो राजस्व रिकॉर्ड, नक्शे और दस्तावेज दिखाए।
- पूर्व रियासत की निजी संपत्ति थी तो विलय समझौते और हस्तांतरण के कागजात सामने लाए।
- विवादित है तो अदालत या वैधानिक प्रक्रिया अपनाए।
- कार्रवाई से पहले नोटिस दिया गया या नहीं, सुनवाई का मौका मिला या नहीं और पुनर्वास के नियम लागू हुए या नहीं।
सिर्फ अधिकारी पहुंच गए इसलिए जमीन सरकारी नहीं हो जाती। आदेश से इतिहास नहीं बदलता। गरीब को अतिक्रमणकारी घोषित कर देने से सरकार मालिक नहीं बन जाती।
कानून अमीर और गरीब के लिए एक होना चाहिए। रसूखदारों के कब्जों पर चुप्पी और गरीबों की झोपड़ी पर तुरंत कार्रवाई—यह दोहरा रवैया लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करता है।
आखिर में एक ही बात रह जाती है—जिस जमीन पर बुलडोजर चल रहा है, उसका मालिकाना हक साबित कीजिए। सरकारी है तो दस्तावेज दीजिए। निजी है तो अधिकारों का सम्मान कीजिए। विवादित है तो पहले फैसला कीजिए।
गरीब की झोपड़ी गिराना आसान है। न्याय की कसौटी पर अपना हक साबित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

